ऑफ द रिकॉर्डः दिल्ली से सब भाजपा नेता डरते हैं

नेशनल डेस्कः भाजपा अध्यक्ष अमित शाह देशभर का दौरा कर रहे हैं और कुछ राज्यों की उन्होंने 8 से 10 बार यात्रा की। उन्होंने डींग मारी है कि भाजपा लोकसभा चुनावों में 350 सीटों पर जीत हासिल करेगी जिनमें पूर्वोत्तर की सभी 25 सीटें भी शामिल हैं लेकिन जब वह दिल्ली आते हैं तो उनका नजरिया कुछ और होता है। जब उनसे पूछा गया कि वह दिल्ली से क्यों दूर रहते हैं तो उन्होंने साधारण रूप से कहा, ‘‘दिल्ली के कामकाज को अरुण जेतली देखते हैं।’’ उन्होंने स्पष्ट किया कि जेतली लम्बे समय से दिल्ली सहित बहुत से राज्यों में पार्टी के कामकाज को देख रहे हैं। वास्तव में भाजपा का कोई भी नेता दिल्ली भाजपा इकाई को छूना नहीं चाहता। पार्टी के महासचिव रामपाल से जब इस संबंध में पूछेंगे तो वह कुछ और ही बात कहेंगे।
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प्रधानमंत्री मोदी दिल्ली में न तो कोई रैली को संबोधित करते हैं और न ही भाजपा के किसी नेता को मिलते हैं। यद्यपि वह प्रत्येक राज्य में अलग-अलग सभी नेताओं से मिलना पसंद करते हैं। दिल्ली में लोकसभा की 7 सीटें हैं। यहां के सांसद और मंत्री खुद को अनाथ महसूस करते हैं क्योंकि कोई भी इनके मामलों में संलिप्त नहीं होना चाहता। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी चाहते हैं कि अमित शाह एक रैली को संबोधित करें मगर शाह ने बड़ी नम्रतापूर्वक इंकार करते हुए कहा, ‘‘दिल्ली के अलावा और भी बहुत काम हैं।’’
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स्पष्ट है कि कोई भी भाजपा नेता दिल्ली इकाई के पेचीदा मामलों में दखल नहीं देना चाहता। यद्यपि भाजपा का तीनों एम.सी.डी., एन.डी.एम.सी., कैंटोनमैंट बोर्डों, डी.डी.ए., सी.पी.डब्ल्यू.डी., एल. एंड डी.ओ., पुलिस, उप राज्यपाल और विभिन्न संस्थाओं पर कब्जा है मगर कोई भी इसकी जिम्मेदारी नहीं लेना चाहता। इससे पहले एक योजना थी कि दिल्ली में नया पार्टी प्रधान बनाया जाए मगर इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और अब तिवारी लोकसभा चुनावों तक अपने पद पर बने रहेंगे।

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