चाणक्य नीतिः विष के समान होते हैं ये लोग

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आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी उतना ही महत्व है, जितना कि उस समय में होता था। चाणक्य ने अपनी नीतियों में बहुत सारी ज्ञान की बातें बताई है, जिसे अगर व्यक्ति अपना लें तो उसकी सारी मुसीबतों का हल निकल सकता है। उन्होंने अपनी नीति में यह भी बताया है कि कैसे व्यक्तियों से दूरी बनानी और किन लोगों का साथ मांगना चाहिए। कहते हैं कि जैसे विष हर हालात में विष का ही काम करता है, ठीक वैसे ही जो लोग चरित्र के सही नहीं होते वे भी अपना स्वभाव नहीं छोड़ते हैं। वे हमेशा दूसरों के साथ बूरा व्यवहार करते हैं, क्योंकि वे अपने इस बूरे स्वभाव के आदि हो जाते हैं और अपने इस नैचर को नहीं छोड़ते हैं। इसलिए चाणक्य ने इन लोगों से दूरी बनाने की बात कही है। 


श्लोकः
विषं विषमेव सर्वकालम्।

अर्थ : विष प्रत्येक स्थिति में विष ही रहता है।

भावार्थ :विष का प्रभाव प्रत्येक काल में एक जैसा ही रहता है। उसी प्रकार दुष्ट व्यक्ति का प्रभाव भी प्रत्येक काल में एक जैसा ही रहता है। वह अपने स्वभाव को बदल नहीं सकता।
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