सत्ता परिवर्तन से भी बेअसर रहता है ‘आम आदमी का जीवन’

इन चुनावों मेें मेरे व्यक्तिगत जीवन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मैं अधेड़ उम्र का सवर्ण हिन्दू हूं और मेरी आॢथक स्थिति अच्छी है। मुझे जीवन में कभी किसी कठिनाई या पूर्वाग्रह का सामना नहीं करना पड़ा और मैंने न तो कभी सरकार से कुछ विशेष चाहा और न ही उससे किसी चीज की जरूरत पड़ी। किसी भी सरकारी नीति का मुझ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। 

मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल में भी मेरी जिंदगी ऐसी ही थी तथा मोदी और वाजपेयी के कार्यकाल में भी। यहां तक कि दखलंदाजी वाली किसी नीति का भी मुझ पर या मेरे जैसे अन्य लोगों पर कोई असर नहीं पड़ता। नोटबंदी का मुझ पर कोई असर नहीं पड़ा। मैं लाइन में खड़ा नहीं हुआ तथा व्यक्तिगत तौर पर मुझे कोई असुविधा नहीं हुई। मेरे पास आधार कार्ड या राशन कार्ड नहीं है तथा सरकार से मुझे वास्ता कम ही पड़ता है। 

मुझे कुछ वर्षों में एक बार पासपोर्ट रिन्यू करने की जरूरत पड़ती है और उसके लिए मुझे किसी कार्यालय में एक आध घंटा खड़ा होना पड़ता है। इसके अलावा मुझे नहीं लगता कि मोदी या सिंह या वाजपेयी अथवा किसी अन्य के किसी कार्य से मेरे जीवन पर अच्छा या बुरा कोई असर पड़ता है। मैं अधिक आयकर देने को तैयार हूं क्योंकि मेरे पास मेरी जरूरतों से अधिक पैसा है। मैं उन लोगों में से नहीं हूं जो केन्द्रीय बजट में कर दरें घटाए जाने पर खुशी महसूस करते हैं। 

दूसरी तरफ, सुरक्षा के मामले में मेरे वर्ग या विशेषाधिकार के कारण मैं व्यक्तिगत तौर पर कभी भी राजनीतिक हिंसा का शिकार नहीं बना। मैंने दो बड़े दंगे देखे और महसूस किए हैं। इनका मुझ पर कोई शारीरिक या आॢथक असर नहीं पड़ा। मैं असुरक्षित नहीं था और न ही मेरे किसी परिचित को कोई नुक्सान हुआ। मुझ पर ङ्क्षहसा का कोई सकारात्मक असर भी नहीं पड़ा तथा मैंने किसी प्रकार अस्मिता या अस्मिता खोने का अनुभव नहीं किया। मैंने गुजराती होने पर शॄमदा अनुभव किया और आज भी करता हूं। किसी समुदाय को सामूहिक तौर पर सजा देना बर्बरता है। सभ्य लोग ऐसा नहीं करते, वे न तो इसका समर्थन करते हैं और न ही इसकी अनदेखी।

इन चुनावों के दौरान इस प्रचार के दौरान दोनों तरफ से किसी भी ऐसी बात की पेशकश नहीं की गई जिससे मेरे जीवन में बदलाव आए। मैं लगभग 50 वर्ष का हूं और मैंने अपने जीवन में कई आम चुनाव देखे हैं। चुनावों में कही जाने वाली बातों  से मुझ पर कोई खास असर नहीं पड़ता। इन चुनावों में एक उम्मीदवार ने कहा कि गांधी का हत्यारा देशभक्त था। उसकी पार्टी ने उससे माफी मांगने को कहा है लेकिन वास्तविकता यह है कि वह ‘सही’ है। इसके नेता द्वारा दी गई देशभक्ति की परिभाषा के अनुसार गोडसे देशभक्त था। 

एक व्यक्ति जो कर देता है और भारतीय कानून का पालन करता है, वह देशभक्त नहीं है। देशभक्त बनने के लिए आपको पाकिस्तान के खिलाफ घृणित बातें कहनी होंगी। भाजपा की नजर में साध्वी प्रज्ञा गलत नहीं है और  यही कारण है कि उनका लोकसभा टिकट बरकरार रहा। जैसा कि मैंने पहले कहा कि इन सब बातों से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता और मैंने किसी के लिए वोट नहीं किया है। मैंने अन्य देशवासियों के लिए वोट डाला है जिन पर इस चुनाव का प्रभाव पड़ेगा। हम में से बहुत से लोग ऐसे होंगे जिनको सरकार के कारनामों के कारण जानबूझ कर नुक्सान पहुंचाया जाएगा। हम में से लाखों लोग ऐसे होंगे जो बहुसंख्यक विचारधारा के कारण डर और असुरक्षा महसूस करेंगे। मैंने अपने इन साथी नागरिकों की सुरक्षा और भलाई के लिए वोट डाला है जिनकी मैं ङ्क्षचता करता हूं।-आकार पटेल

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