84 दंगों का दर्दः 34 साल, 10 कमिशन और 2 SIT, 650 केस में से 268 की फाइलें गायब

नई दिल्ली:  दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सिख विरोधी दंगों से जुड़ें मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को उम्रकैद मिलने से जहां दंगा पीड़ित परिवारों में खुशी है, वहीं उनका कहना है कि उसे सरेआम फांसी पर चढ़ाया जाना चाहिए।

पीड़ितों का कहना है कि जो उस समय उनके साथ किया गया, वह कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। कई महिलाओं और पुरुषों ने अपनी दास्तां सुनाते हुए कहा कि  प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली सहित देश भर में दंगे भड़के गए थे, जिससे बचने के लिए 30 हजार सिख परिवार पलायन करके पंजाब आए थे। देश-भर में दिन-दहाड़े 15,000 सिखों की हत्या कर दी गई थी। पीड़ितों ने बताया कि दंगों के 650 से ज्यादा केस दर्ज जिसमें से 268 फाइलें गायब कर दी गई, जबकि 241 केसों को ही बंद कर दिया।
 


दंगों की जांच के लिए गठित 10 कमीशन और 2 एस.आई.टी. किसी भी दोषी को सलाखों के पीछे लाने में कामयाब नहीं हो पाई। अब तक सिर्फ 60 केस फिर से खोले गए।  हालात सुधरने के बाद काफी लोग अपने-अपने शहरों में चले गए लेकिन 16 हजार परिवारों का इतना नुकसान हुआ कि वह आज तक अपने घर नहीं लौट सके।

महिलाओं ने बताया कि उस समय दंगाइयों ने किसी को भी नहीं बख्शा, कई गर्भवतियों को भी घसीटा गया, वे कई-कई दिन भूखे, प्यासे रहे और यहां तक कि पहनने के लिए कपड़े तक भी नसीब नहीं हुए थे। 8,000 से भी अधिक परिवार प्रभावित हुए थे। पीड़ितों ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि 34 साल उसने दोषियों को खुल कर बचाया यहां तक कि कोर्ट ने भी राजनीतिक संरक्षण की बात मानी है। 

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