हॉकी की ‘युवा ब्रिगेड’ के लिए ‘टानिक’ की तरह रहा यूरोप दौरा

Friday, August 18, 2017 4:37 PM
हॉकी की ‘युवा ब्रिगेड’ के लिए ‘टानिक’ की तरह रहा यूरोप दौरा

नई दिल्ली: पिछले साल जूनियर विश्व कप जीतकर अपने तेवर जाहिर करने वाली भारतीय हॉकी की युवा ब्रिगेड का सीनियर स्तर पर पदार्पण सपने जैसा रहा और यूरोप दौरे पर दिग्गजों को हराने के बाद अब वे किसी भी टीम का सामना करने के लिए तैयार हैं। यूरोप दौरे पर भारतीय टीम में 6 खिलाड़ी सीनियर स्तर पर पहला टूर्नामेंट खेल रहे थे। भारत ने पहले दो मैचों में बेल्जियम से मिली हार के बाद दुनिया की चौथे नंबर की टीम नीदरलैंड को लगातार दो मैचों में हराया और आखिरी मैच में आस्ट्रिया को मात दी।  

इस दौरे पर नियमित फारवर्ड एस वी सुनील, आकाशदीप सिंह और अनुभवी मिडफील्डर सरदार सिंह के अलावा गोलकीपर कप्तान पी आर श्रीजेश भी टीम में नहीं थे। ऐसे में फारवर्ड गुरजंत सिंह, अरमान कुरैशी, मिडफील्डर नीलकांता शर्मा, डिफेंडर वरूण कुमार और दिप्सन टिर्की, गोलकीपर सूरज करकेरा के पास अपनी उपयोगिता साबित करने का सुनहरा मौका था और वे इस पर खरे भी उतरे। इनमें से सूरज को छोड़कर सभी खिलाड़ी लखनउ में 2016 जूनियर विश्व कप विजेता टीम में शामिल थे।  सभी खिलाडिय़ों ने इस दौरे को यादगार बताते हुए कहा कि सीनियर स्तर पर खेलने का दबाव झेलने में यह मील का पत्थर साबित होगा।   

अरमान ने कहा कि हम सभी जूनियर स्तर पर साथ खेले हैं लिहाजा आपसी तालमेल बहुत अच्छा था। सीनियर स्तर पर मानसिक और तकनीकी तौर पर अधिक ढृंढ होने की जरूरत थी और इस दौरे पर मिली जीत ने हमें वह आत्मविश्वास दिया। बेल्जियम के खिलाफ पहले मैच में गोल करने वाले अरमान ने कहा कि हम भले ही बेल्जियम से हार गए लेकिन हमारा प्रदर्शन खराब नहीं था । मैच दर मैच उसमें सुधार आया और पहले दो मैचों की हार ने उस नीदरलैंड के खिलाफ जीतने की प्रेरणा दी जिसमें सारे अनुभवी खिलाड़ी थे।

वरूण ने कहा कि नीदरलैंड पर मिली जीत को खिलाड़ी ताउम्र नहीं भुला सकेंगे। उन्होंने कहा कि हमारी टीम में ज्यादातर युवा खिलाड़ी थे जबकि नीदरलैंड दुनिया की चौथे नंबर की टीम है। किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि हम लगातार दो मैचों में उसे हराएंगे।यह जीत हमारे लिये टानिक की तरह रही और इसका असर लंबे समय तक रहेगा।




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