श्री गुरु रविदास प्रकाश पर्व पर संत निरंजन दास की अगुवाई में वाराणसी के लिए हुई स्पैशल ट्रेन रवाना

Monday, January 29, 2018 10:33 AM

जालंधर, (गुलशन): श्री गुरु रविदास महाराज के 641वें प्रकाश पर्व को मनाने के लिए डेरा संत सरवन दास सचखंड बल्लां के गद्दीनशीन संत निरंजन दास की अगुवाई में वाराणसी के लिए स्पैशल ट्रेन रविवार बाद दोपहर 2.50 पर रवाना हुई। 22 कोचों व 2 एस.एल.आर. वाली स्पैशल ट्रेन में करीब 1650 श्रद्धालु प्रकाश पर्व मनाने वाराणसी के लिए रवाना हुए। 

उल्लेखनीय है कि गुरु रविदास जन्मस्थान पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन व डेरा सचखंड बल्लां के संत निरंजन दास द्वारा हर साल वाराणसी के लिए स्पैशल ट्रेन बुक करवाई जाती है। इस बार भी यह स्पैशल ट्रेन 40.56 लाख रुपए में बुक करवाई गई। ट्रेन बुक होने के बाद सीटें अलाट करने से लेकर श्रद्धालुओं के खाने-पीने तक की सारी व्यवस्था डेरे की तरफ से की गई थी। स्पैशल ट्रेन को रवाना करने के लिए श्रद्धालुओं में काफी उत्साह पाया जा रहा था। 


दूरदराज से आने वाली संगत सुबह से ही स्टेशन पर पहुंचना शुरू हो गई थी। संगत की सुविधा के लिए स्टेशन के बाहर कई प्रकार के लंगर लगाए गए थे। स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में लगे डी.जे. की धुनों पर नौजवानों ने खूब भंगड़ा डाला। वहीं प्लेटफार्म नंबर 1 पर ढोल-ताशों की थाप पर महिलाओं ने भी नृत्य कर अपनी खुशी व्यक्त की। 


इससे पहले संत निरंजन दास एक भव्य शोभायात्रा के रूप में रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। रास्ते में बी.एस.एफ . चौक के पास गुरु रविदास एजुकेशन चैरिटेबल ट्रस्ट बूटा मंडी के प्रधान सेठ सतपाल मल, विधायक राजेंद्र बेरी, ठाकुर दास सुमन, सुरिन्द्र कुमार व अन्य ने उनका स्वागत किया। जैसे ही संत निरंजन दास रेलवे स्टेशन के बाहर लगे पंडाल में पहुंचे तो वहां पहले से ही मौजूद भारी संख्या में संगत उनके इंतजार में खड़ी थी। संत निरंजन दास ने गद्दी पर विराजमान होकर समूह संगत को दर्शन दिए और कई गण्यमान्यों को सम्मानित किया। इस मौके पर डेरे के मुख्य सेवादार निर्मल सिंह, सुरिन्द्र महे, तरसेम लाल इत्यादि मौजूद थे। 


जैसे ही वह ट्रेन में सवार होने के लिए स्टेशन परिसर में दाखिल हुए तो स्टेशन गुरु रविदास महाराज के जयकारों से गूंज उठा। पुलिस कर्मचारियों व डेरे के सेवादारों द्वारा कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें फूलों व गुब्बारों से सजी ट्रेन के सी-11 कोच तक लाया गया। सीट पर बैठने से पहले संत निरंजन दास जी ने दरवाजे पर खड़े होकर श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। संगत के ट्रेन में सवार होने के बाद ट्रेन अपने निर्धारित समय 2.50 पर रवाना हो गई। जिक्रयोग्य है कि वाराणसी में 31 जनवरी को प्रकाश पर्व मनाने के बाद यह स्पैशल ट्रेन 1 फरवरी को वहां से चलकर 2 फरवरी को वापस जालंधर पहुंचेगी।


ट्रेन रवाना होने के बाद प्रशासन ने ली राहत की सांस
वाराणसी के लिए स्पैशल ट्रेन रवाना होने के समय स्टेशन पर हजारों लोग मौजूद थे लेकिन गनीमत रही कि किसी तरह की कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। इंजन के आगे खड़े कुछ युवकों की मामूली बात को लेकर आपस में तू-तू, मैं-मैं हो गई परंतु हाथापाई होने से पहले ही वहां खड़े लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत करवा दिया। सुख-शांति से ट्रेन को रवाना करना रेलवे के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई थी जिस कारण सुबह से ही जिला पुलिस, जी.आर.पी., आर.पी.एफ . के अलावा रेलवे अधिकारी भी डटे हुए थे। शांति से ट्रेन रवाना होने के बाद जिला पुलिस व रेल प्रशासन ने राहत की सांस ली।

 

चोरी व गुमशुदगी की आधा दर्जन से ज्यादा हुई घटनाएं
स्टेशन पर भारी भीड़ के चलते जेबकतरे भी सक्रिय रहे। जानकारी के मुताबिक जी.आर.पी. के पास करीब आधा दर्जन से ज्यादा चोरी व गुमशुदगी की शिकायतें पहुंची हैं जिनमें अधिकतर पर्स व मोबाइल चोरी की घटनाएं हैं। पुलिस ने इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कर ली है। इसके अलावा ट्रेन रवाना होने से पहले एक 4 साल के बच्चे के गुम होने की भी अनाऊंसमैंट बार-बार पूछताछ केंद्र से होती रही।


भीड़ के कारण स्टेशन पर आने-जाने वालों को हुई परेशानी 
स्पैशल ट्रेन की वजह से स्टेशन पर सुबह से ही काफी भीड़ रही। भीड़ के कारण स्टेशन पर आने-जाने वाले यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। करीब 1.15 बजे नई दिल्ली से आने वाली शताब्दी एक्सप्रैस जालंधर पहुंची। भीड़ के कारण शताब्दी एक्सप्रैस के यात्रियों को अपना सामान लेकर स्टेशन से बाहर आने के लिए परेशान होना पड़ा। उल्लेखनीय है कि शताब्दी अपने निर्धारित समय से करीब पौना घंटा देरी से पहुंची थी। शताब्दी निकलने के बाद वाराणसी जाने वाली स्पैशल ट्रेन को प्लेटफार्म नंबर एक पर प्लेस किया गया।


स्पैशल ट्रेन रवाना होते ही संगत ने रेल लाइनों को छूकर जताई आस्था 
सिटी रेलवे स्टेशन से जैसे ही वाराणसी जाने वाली स्पैशल ट्रेन चली तो संगत हाथ जोड़कर खड़ी हो गई। ट्रेन निकलते ही ज्यादातर संगत ने रेल लाइनों को छूकर अपनी आस्था जताई। युवाओं के साथ-साथ कई बुजुर्ग महिलाएं भी रेल ट्रैक को माथा टेकती नजर आईं। संगत में आस्था इस कदर थी कि ट्रेन जितनी देर प्लेटफार्म नंबर एक पर खड़ी रही तब तक कई महिलाएं रेल लाइनों के ऊपर ही बैठी रहीं।


रेल ट्रैक पर लगाए पटाखे, मौके पर हुए ठुस्स
भक्तिभाव में संगत रेल नियमों को भी भूल चुकी थी। ट्रेन रवाना होते समय सैंकड़ों लोग इंजन के आगे रेल लाइनों में खड़े थे। कुछ युवक तो इंजन के ऊपर भी चढ़े हुए थे। ट्रेन को प्लेटफार्म नंबर एक से निकालने के लिए रेल ट्रैक पर पटाखे लगाए गए ताकि पटाखों की आवाज सुनकर संगत दूर हट जाए परंतु मौके पर पटाखे ठुस्स हो गए। पटाखे न चलने पर आर.पी.एफ. के जवानों ने संगत को रेल लाइनों से हटाया। उल्लेखनीय है कि यह पटाखे धुंध के मौसम में रेल लाइनों पर लगाए जाते हैं ताकि ड्राइवर को पता चल सके कि आगे सिग्नल है।



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