मनी लांड्रिंग को लेकर प्रॉपर्टी डीलर्स पर कसेगा शिकंजा

Monday, May 15, 2017 1:10 PM
मनी लांड्रिंग को लेकर प्रॉपर्टी डीलर्स पर कसेगा शिकंजा

नई दिल्लीः काले और सफेद में प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री करने में माहिर डीलरों पर अब मनी लांड्रिंग का शिकंजा कसेगा। सरकार ने प्रॉपर्टी डीलरों को मनी लांड्रिंग रोकथाम कानून के दायरे में लाने का फैसला कर लिया है। सरकार इसके लिए जरूरी कानूनी संशोधनों की तैयारी में जुट गई है। इस सिलसिले में सोमवार को वित्त मंत्रलय में अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआइयू) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक भी मौजूद रहेंगे।

सूत्रों के अनुसार पिछले साल ईडी ने सर्वे कराया था कि कालेधन का इस्तेमाल किन-किन क्षेत्रों में हो रहा है। इसमें रियल एस्टेट सेक्टर की पहचान सबसे अधिक कालेधन के इस्तेमाल वाले क्षेत्र के रूप में हुई थी। सर्वे के नतीजों के अनुसार बिना कालाधन, रियल एस्टेट का कोई भी सौदा पक्का नहीं होता है। सरकार इसके बाद से ही रियल एस्टेट में कालेधन के इस्तेमाल पर लगाम लगाने की तैयारी में जुट गई थी। इसके लिए रियल एस्टेट कंपनियों पर शिकंजा कसने के लिए रियल एस्टेट रेगुलेशन एक्ट (रेरा) बनाया गया था।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि रेरा लागू होने के बावजूद रियल एस्टेट में कालेधन के इस्तेमाल को प्रतिबंधित करने के लिए किसी कड़े कानून की जरूरत महसूस की जा रही थी, जिसमें आरोपियों के खिलाफ कड़ी सजा का भी प्रावधान हो। इसके तहत ही प्रॉपर्टी डीलर को मनी लांड्रिंग रोकथाम कानून के तहत लाने का फैसला किया गया। दरअसल रियल एस्टेट में कालेधन के इस्तेमाल में प्रॉपर्टी डीलर अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं तय करते हैं कि कितना धन चेक से दिया जाएगा और कितना नकद दिया जाएगा। नकद में दी गई रकम की जिम्मेदारी भी वही लेता है। इसके लिए नई अधिसूचना जारी कर मनी लांड्रिंग रोकथाम कानून की धारा 2(1)(8ए)(3) में प्रॉपर्टी डीलर को भी शामिल कर दिया जाएगा।

इसके बाद ईडी को प्रॉपर्टी डीलरों के खिलाफ मनी लांड्रिंग की कार्रवाई करने का अधिकार मिल जाएगा। ध्यान देने की बात है कि मनी लांड्रिंग रोकथाम कानून के तहत ईडी को काले धन की कमाई जब्त करने का अधिकार है। प्रॉपर्टी डीलरों को मनी लांड्रिंग के दायरे में लाने के लिए जरूरी अधिसूचना के साथ-साथ सोमवार की बैठक में नए सिरे से प्रॉपर्टी डीलर की परिभाषा तय की जाएगी। यह भी तय किया जाएगा कि कितनी कमाई करने वाले प्रॉपर्टी डीलरों को इस कानून के दायरे में लाया जाए। इसके लिए उनकी आमदनी की अधिकतम सीमा तय की जा सकती है।’ 
 



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