‘आप’ का चौथा उम्मीदवार भी मैदान में, मुश्किल में केजरीवाल

Saturday, January 6, 2018 9:53 AM
‘आप’ का चौथा उम्मीदवार भी मैदान में, मुश्किल में केजरीवाल

नई दिल्ली: राज्यसभा के लिए आम आदमी पार्टी का चौथा उम्मीदवार भी मैदान में आ गया है जिससे अरविंद केजरीवाल की मुश्किल बढ़ गई है। दिल्ली सरकार में पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने ट्वीट कर कहा कि शहीद संतोष कोली की मां कलावती कोली ने शुक्रवार को सुबह 11.30 बजे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर के सामने धरना भी दिया। इसके बाद केजरीवाल घर से भाग गए। कपिल ने कहा कि नामांकन करने के लिए 7 विधायकों की जरूरत होगी। नामांकन कराने में कोई व्हिप लागू नहीं होगा, इसलिए सभी विधायकों से अपील है कि वे अंतरात्मा की आवाज सुनकर कलावती का नामांकन कराने के लिए आएं।

‘आप’ के राज्यसभा सदस्य के उम्मीदवार
संजय सिंह: आंदोलन के वक्त से जुड़े 46 वर्षीय संजय सिंह ‘आप’ में पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी संभालने के साथ वह उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रभारी भी हैं। 2017 में पंजाब विधानसभा चुनाव में संजय के प्रभारी रहते हुए ‘आप’ विपक्ष में आई। 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव के वक्त वह चुनाव अभियान समूह के सदस्य भी रहे हैं। यू.पी. के सुल्तानपुर से ताल्लुक रखने वाले संजय मैकेनिकल इंजीनियर रह चुके हैं। 1994 में उन्होंने ‘आजाद समाज समिति’ का गठन किया।

सुशील गुप्ता: कांग्रेस नेता रहे सुशील गुप्ता शिक्षाविद, कृषि के जानकार व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह शिक्षा और हेैल्थ केयर क्षेत्र में काम कर रहे हैं। दिल्ली, पंजाब व हरियाणा में शिक्षा संस्थान चला रहे हैं। हरियाणा में 15000 बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं। 4 बड़े चैरिटेबल अस्पताल चला रहे हैं। एक चैरिटेबल यूनिवर्सिटी का भी मॉडल तैयार कर रहे हैं। 52 साल के गुप्ता दिल्ली के पंजाबी बाग में रहते हैं। उनकी पत्नी कृषि वैज्ञानिक हैं। ‘आप’ में शामिल होने से पहले कांग्रेस नेता के तौर पर सुशील गुप्ता ने केजरीवाल सरकार के खिलाफ वसूली दिवस मनाया था, तब उन्होंने आरोप जड़ा था कि ‘आप’ ने 854 करोड़ रुपए की कमाई को अपने प्रचार में खर्च किया है।

राजस्थान में क्या होगा ‘आप’ का ?
राजस्थान में आम आदमी पार्टी (आप) की तैयारियों को कड़ा झटका लगता हुआ दिख रहा है। कुमार विश्वास के करीबियों का कहना है कि  अब राजस्थान की जिम्मेदारी भी ‘आप’ नेतृत्व को संभालनी चाहिए। उन्हें आशंका है कि उत्तराखंड और गुजरात की तर्ज पर अंतिम क्षणों में राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल का निर्णय चुनाव नहीं लडऩे का हुआ तो कार्यकत्र्ताओं में निराशा होगी।  कुमार विश्वास के नेतृत्व में ‘आप’ की छात्र इकाई सी.वाई.एस.एस. ने कई चुनाव लड़े, जिसमें कुछ सीटों पर अच्छी सफलता पाई। राज्य में संगठन निर्माण पर काम जारी था। दिल्ली में दो बार राजस्थान के कार्यकत्र्ताओं से कुमार ने संवाद भी किया था। वह राजस्थान के कई शहरों में ‘आप’ के लिए माहौल बनाते रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई अहम मसलों को लेकर वसुंधरा राजे की सरकार पर कटाक्ष करते रहे हैं। माना जा रहा है कि अब कुमार राजस्थान में काम नहीं करेंगे जिससे उनकी पूरी योजना पर पलीता लग गया है।

पहले ही तय हो चुका था कुमार का भविष्य!
आम आदमी पार्टी (आप) के संस्थापक सदस्यों में से एक डॉ. कुमार विश्वास का भविष्य मुख्यमंत्री अरविंद  केजरीवाल ने पहले ही तय कर दिया था। ‘आप’ के इन शीर्ष नेताओं के बीच कई मुद्दों पर ठनती रही है। जानकारी के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच पिछले कई दिनों से संवाद भी नहीं हुआ। कुमार विश्वास की ओर से अरविंद केजरीवाल से संपर्क भी किया गया लेकिन मुख्यमंत्री ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।  राज्यसभा में जाने की दावेदारी कर चुके कुमार को हाल ही में अरविंद ने एक ट्वीट के जरिए इशारा किया था कि टिकट या पद चाहने वाले पार्टी छोड़ दें। कुमार के करीबियों के मुताबिक सबसे पहले पंजाब चुनाव में ‘खालिस्तानी तत्वों’ से हाथ मिलाने, टिकट बंटवारे में घालमेल व दुर्गेश पाठक की कार्यशैली पर सवाल उठाने से अरविंद केजरीवाल नाराज हुए थे। इसी के बाद ही कुमार विश्वास ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की आंखों की किरकिरी बन गए।


 



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