दीपावली पर इन जगहों पर जलाएं दीए, आपके घर पधारेंगी लक्ष्मी

Thursday, October 19, 2017 8:42 AM
दीपावली पर इन जगहों पर जलाएं दीए, आपके घर पधारेंगी लक्ष्मी

दीपावली का अर्थ ही है- दीए जलाकर चारों ओर प्रकाश फैलाना। ऐसा माना जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। आपके घर में भी लक्ष्मी पधारें, इसके लिए आवश्यकता है, दीयों को कुछ विशेष स्थानों पर जलाकर रखने की : 


एक दीया पीपल के पेड़ के नीचे जलाना अति शुभ माना जाता है। ऐसा करने से आपकी धन संबंधी समस्याएं दूर होती हैं।


दीवाली वाले दिन अपने प्रवेशद्वार व चौखट पर दोनों ओर दीया जलाने से नकारात्मक ऊर्जा घर से दूर रहती है।


घर के पास वाले चौराहे पर भी दीया जलाना जरूरी है।


घर में पूजा स्थल पर चौमुखा दीया जलाएं, जो सारी रात जलता रहे।


मंदिर में भी दीया अवश्य जलाकर आएं, इससे देवी-देवता प्रसन्न होते हैं।


घर में तुलसी के गमले के पास भी दीया जलाएं व माथा टेकें। 


पानी के नल के पास भी दीपक अवश्य जलाएं। 


एक बात का ध्यान अवश्य रखें, जहां भी दीया जलाकर रखें, दीए को रखने से पहले, वहां कुछ मीठा अवश्य रखें।    


नव संकल्पों के दीप जलाएं
दीपावली कुविचारों और दुर्भावों को तिलांजलि देकर नवसंकल्प लेने का पर्व है। अंतर्मन में सद्विचारों, सुकर्मों का दीप सदा दैदीप्यमान रहे, ऐसी कामना हर जन में होनी चाहिए। आइए इस दीपपर्व पर हम दिखावे से दूर, सादगी से परंपराओं का निर्वाह करते हुए नव संकल्पों का दीप प्रज्वलित कर दीपावली के शुभ संदेशों को जीवन में उतारें और पर्व को सार्थक बनाएं।   

  
बुराइयों का सफाया करें

दीपावली के आगमन के साथ प्रारंभ होती है घर-आंगन की साफ-सफाई। सभी चाहते हैं कि उनका घर व आसपास गंदगी मुक्त हो जाए लेकिन कितना अच्छा हो यदि हम इस गंदगी के साथ ही अपनी मानसिक गंदगी का भी सफाया करें, यानी मन में व्याप्त नकारात्मक विचार, संकुचित दृष्टिकोण, निजी स्वार्थ, आलस्य, उन्माद, आक्रोश, अहंकार, घृणा, द्वेष, लालच आदि दुर्भावों को निकाल फैंकें। इनकी जगह सकारात्मक सोच, नवीन रचनात्मकता, धैर्य, विवेक, साहस, प्रेम, सौहार्द, दया, करुणा आदि सद्भावों को जीवन में शामिल करें तो निश्चित रूप से व्यक्तित्व तो निखरेगा ही साथ ही सफलता का ऐसा उजास फैलेगा कि हर दिन दीपावली होगी।     

       
उचित और न्यायपूर्ण तरीके से धन कमाएं   
दुनिया में आज धन को ही सब कुछ मान लिया गया है। तमाम सुख-सुविधा, आराम के पीछे धन का हाथ है। धन के बिना जीवन की गाड़ी नहीं चल सकती लेकिन यदि धन ही सब कुछ होता तो दुनिया में सबसे ज्यादा सुखी धनवान ही होते, जबकि ऐसा है नहीं। धन-संपन्न बनिए लेकिन निरंतर आवश्यक व उचित प्रयत्न करके। अनुचित और अन्यायपूर्ण तरीके से कभी धन प्राप्त करने का प्रयास नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा धन टिकाऊ और शुभ फल देने वाला नहीं होता।   

            
एक दीप इनके लिए भी जलाएं 
हमारे आसपास न जाने ऐसे कितने लोग हैं जिनका अपना कोई नहीं, जो अभावग्रस्त हैं, जिनके जीवन में अंधेरा है गरीबी और अशिक्षा का। क्या हमारा दायित्व नहीं बनता कि हम उनके जीवन को खुशियों की रोशनी से आलौकित करें। दीपपर्व पर अपने बजट के अनुरूप गरीब बच्चों को मिठाइयां, फल, कपड़े व किताबें आदि खरीदकर जरूर दें। अनाथ आश्रम एवं वृद्धाश्रम जाकर अनाथ बच्चों एवं वृद्धों को जरूरत की चीजें भेंट करें। अपनों के लिए तो सब करते हैं लेकिन औरों को देने का आनंद ही अलग है। जब आप इस प्रकाशोत्सव के मौके पर इनके चेहरे पर मुस्कुराहट देखेंगे, तब आपकी खुशियां भी दोगुनी हो जाएंगी।


उजास की आराधना करें, संघर्ष की साधना करें  
जीवन में कई बार ऐसी विषम परिस्थितियां आती हैं, जब सर्वत्र अंधेरे का साम्राज्य नजर आता है, कोई रास्ता दिखाई नहीं देता, जिंदगी अवसाद, निराशा, डर, नकारात्मकता के गहन अंधियारे में खोने लगती है। ऐसे में अपने भीतर नवीन आशाओं के दीप जलाएं, सकारात्मक सोच व अंधेरे से लडऩे का आत्मबल विकसित करें। दृढ़ संकल्पित होकर दीप की भांति उजास की आराधना करें, संघर्ष की साधना करें। लौ की तरह ऊंचाई की ओर जाने का लक्ष्य रखें यही हमारी प्रगति और उजाले की ओर बढऩे का आधार है।



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