नदियों में गाद और बाढ़ की समस्या के लिए ‘राष्ट्रीय तलछट प्रबंधन नीति’ तैयार करने की पहल

Monday, September 11, 2017 12:44 PM
नदियों में गाद और बाढ़ की समस्या के लिए ‘राष्ट्रीय तलछट प्रबंधन नीति’ तैयार करने की पहल

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ²ष्टि को रेखांकित करते हुए जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय गंगा समेत विभिन्न नदियों में गाद के कारण उत्पन्न समस्याओं को देखते हुए राष्ट्रीय तलछट प्रबंधन नीति तैयार करने की पहल कर रहा है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों में गंगा समेत अनेक नदियों में गाद की समस्या आज एक बड़ी चुनौती है । इसके कारण बाढ़ की विभीषिका भयावह रूप ले रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने संबोधन में इस विषय को रेखांकित किया। इस बारे में विशेषज्ञों से सुझाव प्राप्त किए गए हैं। अधिकारी ने बताया कि हम विभिन्न पक्षों से सुझाव प्राप्त कर रहे हैं जो राष्ट्रीय तलछट प्रबंधन नीति तैयार करने में मददगार होंगे। उन्होंने बताया कि ऐसे सुझाव पर भी विचार किया जा रहा है कि नदी की गाद साफ करने के बाद उससे निकाली गई मिट्टी का उपयोग सड़क निर्माण में किया जाए । हालांकि यह अभी विचार के स्तर पर ही हैं।   

उल्लेखनीय है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी पिछले काफी समय से गंगा नदी में गाद की समस्या को उठाते रहे हैं । इस बारे में नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी से चर्चा भी की। केंद्र सरकार ने इस बारे में एक टीम बिहार भेजी थी । इसके अलावा भी विभिन्न विशेषज्ञों ने तलछट प्रबंधन को एक बड़ी समस्या बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि नदियों में तलछट प्रबंधन के संबंध में एक समग्र नीति बनाने की आवश्‍यकता है क्‍योंकि अगर इसका प्रबंधन नहीं किया जायेगा तो बाढ़ की गंभीर समस्‍याएं पैदा होंगी तथा पर्यावरण, नदी के प्रवाह और नौवहन पर असर पड़ेगा।  जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय ने गंगा में गाद की समस्या पर विचार करने के लिये माधव चितले समिति का गठन किया था। समिति ने कुछ समय पहले ही सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। चितले समिति ने अपनी सिफारिशों में कहा कि गाद हटाने की प्रक्रिया का अध्‍ययन करना, पहले हटाई गई तलछट/गाद के बारे में रेत पंजीयन तैयार करना और तलछट बजट बनाने का कार्य एक तकनीकी संस्‍थान को सौंपने और बाढ़ प्रवाह का अध्‍ययन किया जाए। 

इसके तहत सबसे अधिक गाद वाले स्‍थान से गाद हटाने की आवश्‍यकता का निरीक्षण और पुष्टि करने पर विचार किया जाना शामिल है।  मंत्रालय ने भीमगौड़ा(उत्‍तराखंड) से फरक्‍का(पश्चिम बंगाल) तक गंगा नदी की गाद निकालने के लिए दिशा निर्देश तैयार करने के वास्‍ते जुलाई 2016 में इस समिति का गठन किया था।   समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भूमि कटाव, तलछट की सफाई और गाद अति जटिल कार्य हैं। तलछट प्रबंधन और नियंत्रण के संदर्भ में ‘सभी के लिए एक प्रकार’ का रूख अपनाया नहीं जा सकता क्‍योंकि यह मामले अधिकतर क्षेत्र विशेष से जुड़े होते हैं। भौगोलिक, नदी नियंत्रण संरचनाएं, मृदा और जल संरक्षण उपाय, वृक्षों की संख्‍या, नदी के तट की भूमि का उपयोग या उसमें फेरबदल (उदाहरण के लिए कृषि, खनन आदि) जैसे स्‍थानीय कारकों का नदी पर काफी प्रभाव पड़ता है।  
 
 



यहाँ आप निःशुल्क रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, भारत मॅट्रिमोनी के लिए!