खुद के बुने जाल में फंसे हार्दिक!

Thursday, November 9, 2017 11:30 AM
खुद के बुने जाल में फंसे हार्दिक!

नई दिल्ली: हार्दिक पटेल का कांग्रेस के  साथ जाने को लेकर आखिरी दौर शुरू होने जा रहा है। एक दो दिन में इसे लेकर फैसला होने की उम्मीद लगाई जा रही है। हालांकि हार्दिक पटेल अब अपने ही बुने जाल में फंस चुके हैं। राजनीति के जानकारो की मानें तो गुजरात में अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवानी के जुडऩे से वहां कांग्रेस को फायदा होगा। साथ ही इन दोनों युवा नेताओं की राजनीतिक पारी की भी शुरुआत होगी। वहीं दूसरी ओर हार्दिक पटेल के राजनीतिक भविष्य को लेकर अभी अनिश्चितता ही नजर आ रही है। दरअसल इन दोनो की तुलना में  हार्दिक पटेल की राह ज्यादा मुश्किल भरी मानी जा रही है। 

हार्दिक के लिए मुश्किल है पीछे लौटना
जानकारों के मुताबिक पाटीदार आरक्षण को लेकर हार्दिक पटेल ने कांग्रेस के सामने जो शर्तें रखी हैं, उनके माने जाने की संभावना ना के बराबर है। उधर पाटीदार आंदोलन जिस मुकाम पर है, वहां से पीछे लौटना हार्दिक के लिए मुश्किल है। ऐसे में इस आंदोलन के साथ हार्दिक मझदार में फंस गए हैं। फिलहाल, कांग्रेस से जुडऩे के फैसले के बाद अल्पेश ठाकोर के समर्थकों का दायरा बढ़ता नजर आ रहा है। दूसरी तरफ हार्दिक के ऐसा करने से पहले ही उनके दो साथी -वरुण पटेल और रेशमा पटेल  उन पर कांग्रेस का एजेंट होने का आरोप लगाते हुए भाजपा से जुड़ गए। 

भाजपा कर रही है पटेलों में सेंधमारी करने की जोरदार कोशिश
भाजपा पटेलों में सेंधमारी करने की जोरदार कोशिश कर रही है। भाजपा के अपनी कवायद में सफल होने की स्थिति में है। इससे हार्दिक कमजोर पड़ सकते हैं। ऐसा हुआ तो उनकी छवि अपने लोगों पर भी नियंत्रण न रख पाने वाले नेताकी बन जाएगी। वहीं दूसरी ओर अल्पेश और जिग्नेश जिन समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हैं, उनमें ऐसा कोई और चेहरा नहीं है जो इन दोनों के जनाधार को बांट सके। लेकिन प्रदेश में राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक तौर पर सर्वाधिक प्रभावशाली माने जाने वाले पटेलों का मामला उनसे अलग है। यहां बता दें कि पटेल समुदाय का बड़ा तबका भाजपा के साथ रहा है। मौजूदा समय में भी करीब 40 विधायक भाजपा के पटेल समुदाय से ही आते हैं, वहीं आनंदी बेन पटेल जैसा बड़ा चेहरा भी भाजपा के लिए इस समुदाय में सेंध लगाने में सक्षम है।

सिब्बल-पास की बैठक रहीं बेनतीजा
गुजरात में पाटीदार समुदाय को आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस और हार्दिक पटेल की अगुवाई वाले पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति (पास) की देर रात शुरू होकर आज तड़के दो बजे तक चली बैठक बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई।  हार्दिक ने आरक्षण के मुद्दे पर आठ नवंबर तक विपक्षी दल से अपना रूख स्पष्ट करने का अल्टीमेटम दिया था। गत 31 अक्टूबर को पास की कोर कमेटी और कांग्रेस के शीर्ष प्रदेश नेतृत्व की बैठक में आरक्षण को छोड अन्य तीन मुद्दों पर सहमति बन गयी थी। आरक्षण के मामले में कानूनी सलाह दे रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल की मौजूदगी में यहां कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय में रात करीब साढे ग्यारह बजे शुरू हुई बैठक में हार्दिक स्वयं हाजिर नहीं रहे। इसमे पास की कोर कमेटी के 13 सदस्यों ने भाग लिया। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भरतसिंह सोलंकी और अन्य नेता भी इसमें उपस्थित थे। 

दिए 3 विकल्प 
बैठक में कोर कमेटी की अगुवाई करने वाले हार्दिक के करीबी सहयोगी दिनेश बांभणिया ने बाद में पत्रकारों से कहा कि कांग्रेस ने तीन विकल्प सुझाए हैं। इन पर हार्दिक से आज चर्चा के बाद समुदाय से भी राय मशविरा किया जायेगा। इसके बाद पार्टी के साथ एक और बैठक होगी। उन्होंने सिब्बल के साथ हुई बैठक को संतोषजनक करार दिया। दिसंबर में हो रहे गुजरात विधानसभा चुनाव में पास ने कांग्रेस को समर्थन देने के लिए उससे आरक्षण के मुद्दे पर रूख साफ करने को कहा था। हालांकि भाजपा का आरोप है कि हार्दिक और कांग्रेस में पहले से ही मैच फिक्सिंग जैसा समझौता है।  

रेशमा पटेल ने लगाए आरोप
इस बीच हार्दिक की सहयोगी रही पास की पूर्व महिला संयोजक और अब भाजपा में शामिल रेशमा पटेल ने आरोप लगाया कि देर रात कांग्रेस के साथ बंद दरवाजे में हुई नाटकीय बैठक असल में कांग्रेस के एजेंटों और कांग्रेस के बीच चुनाव में टिकट की फिक्सिंग के लिए हुई थी। पास पाटीदार समुदाय को गुमराह कर रहा है। गुजरात की जनता कांग्रेस के 60 साल के काले शासन को भूली नहीं है। 



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