ड्रैगन की भारत के खिलाफ नई चाल, चीन ने तिब्बत में रोका सतलुज का बहाव

Monday, January 8, 2018 10:47 PM
ड्रैगन की भारत के खिलाफ नई चाल, चीन ने तिब्बत में रोका सतलुज का बहाव

नई दिल्ली: चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा और उसने भारत के खिलाफ फिर नई चाल चली है। खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक तिब्बत के त्याक इलाके में सतलुज नदी के भारत में बहाव को रोकने के लिए निर्माण कार्य कर रहा है। बताया जा रहा है कि चीन ने सतलुज नदी के करीब 100 मीटर बहाव को रोककर पानी अपनी तरफ मोड़ा है। 

दरअसल, ड्रैगन सतलुज नदी के बहाव को रोक इसके पानी का इस्तेमाल हाईड्रोइलैक्ट्रिक प्रोजैक्ट के लिए करना चाहता है। इस प्रोजैक्ट के लिए चीन सरहद से 16 किलोमीटर दूर निर्माण कार्य कर रहा है। तिब्बत में सतलुज नदी के किनारे निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली 10 से 15 बड़ी गाडिय़ां देखी गई हैं। साथ ही इलाके में चीनी सैनिकों की भारी हलचल भी देखी गई है। बता दें कि चीन की ओर से पहले ब्रह्मपुत्र के पानी को रोकने की कोशिश भी की जा चुकी है। अब चीन की ओर से सतलुज नदी के पानी के बहाव को रोके जाने संबंधी रिपोट्स पर भारतीय सुरक्षा एजैंसियों ने चिंता जाहिर की है। 

सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि नदियों के पानी को लेकर चीन पिछले 8-10 सालों से इस तरह की गतिविधियों में लगा हुआ है। जानकारों के मुताबिक ऐसी 14 नदियां हैं जिनका उद्गम तिब्बत से होता है। उन्होंने तिब्बत में सतलुज के रिवर बैड पर चीन के प्रोजैक्ट को लेकर कहा कि इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। 

विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि इस तरह के हथकंडे अपनाने से चीन पानी रोक कर हमारे क्षेत्र को सुखा सकता है। ऐसा होता है तो फसलों के उत्पादन में गिरावट का खमियाजा पूरे देश को भुगतना पड़ सकता है। वहीं चीन चाहे तो बड़े पैमाने पर भारतीय क्षेत्रों में पानी छोड़कर भी भारी नुक्सान पहुंचा सकता है। कहा जा रहा है कि चीन सिर्फ सतलुज नदी ही नहीं बल्कि इसी तरीके से कई अन्य नदियों का पानी मोडऩे के लिए भी काम कर रहा है।

भारतीय परियोजनाओं के लिए पैदा हो सकता है जल संकट
सतलुज नदी के पानी को चीन की तरफ से रोके जाने के बाद भारत में भाखड़ा नंगल बांध और नाथपा झाकड़ी हाईड्रोइलैक्ट्रिक जैसी भारतीय परियोजनाओं के लिए जल संकट पैदा हो सकता है। गौरतलब है कि चीन और भारत के बीच सतलुज और ब्रह्मपुत्र नदियों का डाटा देने के लिए समझौता है। अमूमन दोनों देशों के बीच 15 मई से 15 अक्तूबर के बीच ब्रह्मपुत्र और सतलुज नदियों का डाटा उपलब्ध करवा दिया जाता है लेकिन चीन ने इस साल यह अवधि खत्म हो जाने के बाद भी पानी का डाटा सांझा नहीं किया। इस डाटा से बाढ़ का पूर्वानुमान लगाने में मदद मिलती है। गत वर्ष ब्रह्मपुत्र ने उत्तर पूर्व में बाढ़ से भारी तबाही मचाई थी।



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