सैन्य अदालतों की बहाली को लेकर पाकिस्तान सीनेट प्रमुख ने जताई नाखुशी

Saturday, March 18, 2017 6:06 PM
सैन्य अदालतों की बहाली को लेकर पाकिस्तान सीनेट प्रमुख ने जताई नाखुशी

इस्लामाबाद: पाकिस्तान सीनेट के अध्यक्ष एवं पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के वरिष्ठ नेता मियां रजा रब्बानी ने और दो वर्ष के लिए सैन्य अदालतों को बहाल करने के नवाज शरीफ सरकार के निर्णय की आलोचना की है।  


पाकिस्तान पीपल्स पार्टी समेत राजनीतिक दलों ने सैन्य अदालतों के कार्यकाल को और 2 साल के लिए विस्तार देने का बृहस्पतिवार को निर्णय लिया था। 2 साल की तय अवधि की समाप्ति पर इन अदालतों की कार्य अवधि 7 जनवरी को खत्म हो गई थी। गौरतलब है कि पेशावर स्कूल में वर्ष 2014 में हुए हमले के बाद आतंकवादियों के खिलाफ त्वरित सुनवाई के लिए अस्थायी प्रबंध के तौर पर वर्ष 2015 में इन अदालतों का गठन किया गया था। इस हमले में करीब 150 लोग मारे गए थे जिनमें से अधिकतर छात्र थे।


‘डॉन’ अखबार के अनुसार रब्बानी ने कल सीनेट के सत्र की अध्यक्षता करते हुए कहा कि जनवरी में सैन्य अदालतों की कार्य अवधि समाप्त होने के बाद देश फिर से पहले जैसी अवस्था में पहुंच गया है।उन्होंने खेद जताया कि न्यायिक प्रणाली में सुधार के लिए कुछ नहीं किया गया और मौजूदा हालात से बचा जा सकता था।उन्होंने उम्मीद जताई कि आज से 2 साल बाद स्थिति एेसी नहीं होगी।रब्बानी ने कहा,‘‘जो हो रहा है, मैं उसे लेकर दुखी हूं।’’ पाकिस्तान सीनेट के अध्यक्ष रब्बानी सैन्य अदालतों के कड़े विरोधी रहे हैं और इन अदालतों के गठन के लिए 21वें संवैधानिक संशोधन पर मतदान करने के बाद 7जनवरी 2015 को उनकी आंखों में आंसू आ गए थे। उन्होंने उस समय कहा था कि उन्होंने अपनी अन्तरात्मा के खिलाफ मत दिया है।


रब्बानी को पाकिस्तान के उन कुछ नेताओं में शामिल माना जाता है जो संविधान एवं कानून की सर्वोच्चता में विश्वास रखते हैं।वित्त मंत्री इशाक डार ने रब्बानी के बयान के जवाब में कहा कि सैन्य अदालतें कभी किसी राजनीतिक दल की प्राथमिकता नहीं रहीं। देश में कानून-व्यवस्था की विशिष्ट स्थिति के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया।



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