इंटरव्यू में सफलता पाने के लिए, अपनाएं यह 5 साइकोलॉजिकल ट्रिक्स

Friday, April 21, 2017 4:26 PM
इंटरव्यू में सफलता पाने के लिए, अपनाएं यह 5 साइकोलॉजिकल ट्रिक्स

नई दिल्ली : हम सभी को यह बात पता  है कि किसी भी  इंटरव्यू को पास करने के लिए योग्यता जरूरी है और आपको सब्जेक्ट्स की जानकारी होनी चाहिए। लेकिन कई बार सब्जेक्ट्स की जानकारी होने के बाद भी इंटरव्यू में कहीं ना कहीं कोई कमी रह जाती है और हम इंटरव्यू पास नहीं कर पाते । इसलिए जरुरी है कि हमें अपने सब्जेक्ट्स की जानकारी होने के साथ कई और क्वालिटी भी होनी चाहिए जो उस वक्त आपके काम आ सकती हैं जब कंपीटिशन काफी कड़ा हो। ऐसे हालात में जरा सी चूक नतीजों पर असर डाल सकती है। आज हम आपको बता रहे हैं ऐसी कुछ साइकोलॉजिकल ट्रिक्स के बारे में जो आपके न सिर्फ आपके काम आ सकती हैं, बल्कि आप इन्टरव्यू करने वाले के सामने धाक भी जमा सकते हैं। कैसे खेलें माइंड गेम 

सभी कंपनियां ऐसे शख्स को जॉब ऑफर करती हैं, जो नॉलेज के साथ साथ मेंटली भी काफी स्ट्रांग हो। इंटरव्यू लेते वक्त पैनल में अक्सर ऐसे लोग बैठते हैं जो पूरे इंटरव्यू के दौरान आपके व्यक्तित्व का पता लगाने की कोशिश करते रहते हैं। ऐसे में आप भी उनके साथ माइंड गेम खेल सकते हैं।

क्या हैं ये साइकोलॉजिकल ट्रिक

सवाल करें 

ऑफर सुनने में अजीब लगता है कि क्या कोई इंटरव्यू देने वाला खुद पूरे इंटरव्यू की दिशा तय कर सकता है।  मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि ये हो सकता है और कई बार जाने अनजाने ये तरीका लोगों के इंटरव्यू की नतीजा तय कर देता है।  इंटरव्यू में अक्सर एक सवाल के जवाब से दूसरा सवाल निकलता है। वहीं इंटरव्यू के दौरान बातचीत की दिशा बदलने के लिए भी इंटरव्यू लेने वाले एक्सपर्ट आपके जवाब से नए सब्जेक्ट के संकेत तलाशते हैं। एक माहिर पैनल की यही खासियत होती है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ये बात आपके लिए प्लस प्वाइंट और माइनस प्वाइंट दोनो ही हो सकती है। अगर आप अपने जवाब में किसी खास बात का जिक्र करते हैं और पैनल के पूछने पर उसे समझा नहीं सकते तो आपके लिए प्रॉब्लम हैं। क्या करें आप अपने सबसे स्ट्रॉन्ग सब्जेक्ट को ध्यान में रखें, किसी भी सवाल का जवाब देते वक्त अपने फेवरेट सब्जेक्ट को जवाब के साथ लिंक करने की कोशिश करें। ऑफर किया जा रहा सब्जेक्ट न तो इतना मुश्किल हो कि सवाल पूछने वाला सवाल ही न पूछ सके। और न ही जॉब से इतना अलग हो कि वो पूछना ही न चाहे। जिस सब्जेक्ट के बारे में नहीं जानते भले ही वो कितना आकर्षक क्यों न हो उससे दूर रहें। आप अपनी हॉबी को भी मौका मिलने पर किसी जवाब के साथ लिंक कर सकते हैं, जिससे इस बात की संभावना हो कि अगला सवाल आपकी उसी हॉबी से जुडा सामने आ जाए।

कलर का सहारा लें
कैरियर बिल्डर द्वारा जारी किए एक सर्वे के मुताबिक आप जिस कलर के कपड़े पहन कर इंटरव्यू देने जा रहे हैं उससे पता चलता है कि आप उस जॉब के लिए कितना सूट करते हैं।सर्वे में शामिल 23 फीसदी एचआर मैनेजर ने माना कि ब्लू रंग को वो टीम वर्क मानते हैं। वहीं 25 फीसदी मानते हैं कि ऑरेंज पहनना अनप्रोफेशनल है। आप जॉब में जिस तरह की जरूरत हो उस हिसाब के कपड़े पहन कर जा सकते हैं।

क्या है रंगों का अर्थ
ग्रे-  लॉजिकल, एनालिटिकल
व्हाइट-  ऑर्गेनाइज्ड
ब्राउन-  दूसरों पर डिपेंडेंट
रेड-  पावर  

जबाव इंटरव्यू लेने वाले की उम्र के हिसाब से दें
किसी भी सवाल का एक ही जवाब होता है हालांकि उसे देने के तरीके अलग अलग होते हैं। बिजनेस इनसाइडर के मुताबिक उम्र के हिसाब से आप एक खास तरीके से जवाब की उम्मीद करते हैं। ये ट्रिक क्रेजी गुड इंटरव्यूइंग नाम की किताब से लिए गए हैं।

इंटरव्यू लेने वाले की उम्र और जवाब का तरीका
अगर इंटरव्यू लेने वाला 20 से 30 साल का है। अपने काम और अचीवमेंट के सैंपल पेश करें। साबित करें कि आप मल्टीटास्किंग हैं। अगर इंटरव्यू लेने वाला 30 से 50 साल का है  जवाब में अपनी क्रिएटिवटी पेश करें और बताएं कि काम और आपकी जिंदगी में बैलेंस ने कैसे आपको सफल बनाया है। यानि ये जताने की कोशिश न करें कि आप 24 घंटे बिना शिकायत काम कर सकते हैं कि क्योंकि इस उम्र का जॉब देने वाला भी जानता है कि न तो ये संभव नहीं है और न ही ये सही है।  अगर इंटरव्यू लेने वाला 50 से 70 साल का है जो भी लोग इस समय इस उम्र वर्ग में हैं उनके लिए मेहनत और सम्मान काफी अहम है। आपके जवाब में मेहनत और दूसरों के लिए सम्मान जरूरी है। सीधे शब्दों में अगर इंटरव्यू लेने वाले की बात काटनी हो तो संभल कर आलोचना करें। जवाब सीमित और नपे तुले हों।

कमीलीअन इफेक्ट
कमेलियन इफेक्ट एक साइकोलॉजिकल कंडीशन है जहां आप ऐसे लोगों को पसंद करते हों जो आपकी तरह की बॉडी लैंग्वेज यूज करते हैं। बॉडी लैंग्वेज एक्सपर्ट पैटी वुड के मुताबिक ये ऐसा ही जैसे सामने वाले के साथ डांस करना। बेसिक पॉजिटिव बॉडी लैंग्वेज से शुरू करें और इंटरव्यू देने वाले की बॉडी लैंग्वेज को फॉलो करें। हालांकि उसे फॉलो करने में अपनी सीमा न छोड़ें। अगर बातचीत ज्यादा चलती है तो एक जैसी बॉडी लैंग्वेज माहौल को दोस्ताना बना सकती है।

सवाल को दोहराएं
इस तरीके को रिफ्लेक्टिव लिसनिंग कहते हैं। जिसमें आप सवाल को इस तरह से दोहराते हैं जिससे सामने ये संकेत जाएं कि आप सुन रहे हैं और सही जवाब देंगे। दरअसल इंटरव्यू के दौरान अगर ये पता चल जाए कि आप किसी वजह से सवाल सुन या समझ ही नहीं रहे हैं तो फिर खेल खत्म । हालांकि ये तरीका भी ऐसा होना चाहिए कि वास्तव में लगे कि आप सवालों को लेकर गंभीर हैं। ये ट्रिक भी सभी सवालों के साथ नहीं होनी चाहिए सिर्फ उन सवालों के साथ होनी चाहिए जो आपके मुताबिक सबसे मुश्किल और सबसे नाजुक हैं। 

सभी एक्सपर्ट्स मानते हैं कि साइकोलॉजिकल ट्रिक्स तभी असर करती हैं जब वो नैचुरली सामने आएं, जबरदस्ती की गई ऐसी ट्रिक्स ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं। वहीं नैचुरल रहना सबसे कारगर साइकोलॉजिकल ट्रिक है, इससे साफ होता है कि आप किसी के साथ माइंड गेम में नहीं है और सामने वाला आप पर विश्वास करता है। कॉन्फिडेंस जॉब को पाने में जितना कारगर होता है ओवरकॉन्फिडेंस उतना ही जॉब के मौके खत्म करता है। आपको इनके बीच का अंतर पता होना चाहिए।

 



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