मध्यप्रदेश में नये शिक्षा सत्र से सरकारी शिक्षकों के लिए होगा ड्रेस कोड

Monday, February 12, 2018 1:53 PM
मध्यप्रदेश में नये शिक्षा सत्र से सरकारी शिक्षकों के लिए होगा ड्रेस कोड

नई दिल्ली : मध्यप्रदेश में आगामी शिक्षा सत्र से सरकारी शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए ड्रेस कोड लागू होगा। शिक्षिका मैरून रंग की जैकेट पहनकर स्कूल आएंगी और शिक्षक नेवी ब्लू रंग की जैकेट पहनकर विद्यालय आएंगे।  इसके लिए मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने सात फरवरी को लोक शिक्षण संचालनालय आयुक्त एवं राज्य शिक्षा केन्द्र संचालक को आदेश जारी कर दिये हैं।  ड्रेस कोड के साथ ही ‘राष्ट्र निर्माता’ की नाम पट्टिका भी इन शिक्षक-शिक्षिकाओं की जैकेट पर लगी रहेगी

मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के उप सचिव के. के. द्विवेदी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है, ‘‘मध्यप्रदेश पंचायत अध्यापक संवर्ग (नियोजन एवं सेवा की शर्तें) नियम 2008 के नियम 8 (छ) के अंतर्गत राज्य शासन की यह अपेक्षा है कि प्रदेश के सभी विद्यालयों में कार्यरत शैक्षणिक संवर्ग की सभी महिला सदस्य मैरून एवं पुरूष सदस्य नेवी ब्लू रंग की जैकेट नियमित रूप से पहनकर विद्यालय में उपस्थित होंगे तथा राष्ट्र निर्माण की नाम पट्टिका भी धारण करेंगे।’’  

इसमें कहा गया है कि नई पीढ़ी में ज्ञान संचेतना, मूल्य चेतना, नैतिक संस्कार बोध तथा आदर्श बोध जागृत करना शिक्षकों का दायित्व है। शिक्षक बच्चों का भविष्य संवारने एवं भावी पीढ़ी को एक जिम्मेदार नागरिक बनाने के वास्ते समाज के लिए पथ प्रदर्शक और भविष्य निर्माता की भूमिका का निर्वहन करते हैं। राष्ट्र निर्माता की उपाधि से अलंकृत शिक्षक देश के नव निर्माण में अपनी अहम भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं।  उक्त संबंध में यूनिफार्म अथवा ड्रेस की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ड्रेस/ परिधान की एकरूपता से न सिर्फ उन सेवाओं से जुड़ाव होता है, बल्कि वैयक्तिक अंतर भी समाप्त होता है। इसलिए शिक्षकों के लिए यह ड्रेस कोड बनाया गया है।इसी बीच, मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री दीपक जोशी ने बताया, ‘‘शिक्षकों के लिए ड्रेस के संबंध में मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री कुंवर विजय शाह ने पिछले साल निर्देश जारी किये थे। अब स्कूल शिक्षा विभाग अगले शैक्षणिक सत्र से इसे लागू करेगा।’’  उन्होंने कहा, ‘‘शिक्षक-शिक्षिकाएं अपने सादे कपड़ों के ऊपर इस जैकेट को पहनेंगे। इससे उनमें एकरूपता आने के साथ-साथ आसानी से पहचाना भी जा सकेगा। इसका उद्देश्य शिक्षक-शिक्षिकाओं को ‘राष्ट्र निर्माण’ की पहचान दिलाना है।



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