DGSE ने दिए अध्यापकों को स्कूलों में 7.45 बजे पहुंचने के आदेश

Sunday, July 16, 2017 9:20 AM
DGSE ने दिए अध्यापकों को स्कूलों में 7.45 बजे पहुंचने के आदेश

पटियाला : डायरैक्टर जनरल आफ स्कूल एजुकेशन (डी.जी.एस.ई.) आई.ए.एस. अफसर कृष्ण कुमार ने आज प्रदेश के अध्यापकों को शिक्षा तंत्र में सुधार के लिए कई आदेश जारी किए। कैप्टन सरकार की तरफ से डी.जी.एस.ई. नियुक्त किए गए कृष्ण कुमार ने आज एजुसैट प्रोग्राम के द्वारा प्रदेश के अध्यापकों के साथ वीडियो कान्फ्रैंसिंग की। इस दौरान उन्होंने अध्यापकों के साथ खुली बातें कीं। उन्होंने अध्यापकों की कई समस्याओं का हल करने और अध्यापकों को भी अपनी ड्यूटी ईमानदारी के साथ करने के लिए कहा। इस वीडियो कान्फ्रैंसिंग में हर स्कूल के अध्यापकों ने शिरकत की, जिन स्कूलों में इंटरनैट सुविधा नहीं थी, उनको अपने नजदीक वाले स्कूलों में पहुंचने के लिए कहा गया था।

 

कृष्ण कुमार ने इस कान्फ्रैंसिंग के द्वारा अपने इरादे स्पष्ट किए कि वह जितना समय भी डी.जी.एस.ई. के तौर पर रहेंगे, प्रदेश के स्कूलों में सुधार करेंगे। इस कान्फ्रैंसिंग दौरान डी.जी.एस.ई. ने माना कि किताबें छापने में देरी हो जाती है परंतु अगले साल से हर हाल में 31 जनवरी से पहले किताबें छाप कर स्कूलों में भेज दी जाया करेंगी। इससे पहले जब अकाली-भाजपा सरकार के समय कृष्ण कुमार डी.जी.एस.ई. थे तो उन्होंने सरकारी स्कूलों में बड़े स्तर पर सुधार किए थे। उनको अध्यापकों के आंदोलन का सामना भी करना पड़ा था क्योंकि उन्होंने स्कूलों में काफी सख्ती कर दी थी।

 
ये हैं अादेश 
- हर अध्यापक स्कूल लगने के समय 8 बजे की बजाय 7.45 बजे स्कूल पहुंचना यकीनी बनाए।
- सुबह की सभा इम्प्रैसिव हो।
-  रोज हर स्कूल प्रमुख बच्चों को नालेज फुल टॉपिक पर भाषण दे
-  स्कूलों में रोजाना पी.टी. यकीनी बनाई जाए।
-  कोई भी ‘बाबू’ प्रमोशन केस तैयार करने के समय अध्यापकों से संबंधित कागज नहीं मंगाएगा।
-  अध्यापकों के इंक्रीमैंट सही समय पर लगने यकीनी बनाए जाएंगे।
- किसी भी अध्यापक को मैडीकल बिलों के लिए डी.ई.ओ. या बी.पी.ई.ओ. दफ्तरों में धक्के नहीं खाने पड़ेंगे।
-  बिना वजह की डाक दफ्तरों में भेजनी बंद की जाए।
-  15 अगस्त से पहले रैशनेलाइजेशन पालिसी बनेगी, उस अनुसार अध्यापकों के तबादले पारदर्शी तरीके से होंगे।
-  हर अध्यापक बच्चों को पुस्तकालय और लैबोरेटरी के साथ जोड़े।
- बच्चों की हाजिरी 100 प्रतिशत यकीनी बनाई जाए।
- स्कूलों में बनाए जाएं बुक बैंक।
- बच्चों को रोजाना होमवर्क दिया जाए और स्कूल हैड खुद बच्चों की कापी चैक करें।
- हर बच्चे को 20 तक पहाड़े आने यकीनी बनाए जाएं।
 




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