लाटरी-सट्टा जिताती हैं ये देवी, जानें किस देव आराधना से होगा कौन सा कार्य सिद्ध

Monday, March 13, 2017 10:46 AM
लाटरी-सट्टा जिताती हैं ये देवी, जानें किस देव आराधना से होगा कौन सा कार्य सिद्ध

सभी जानते हैं कि शासन-व्यवस्था में अलग-अलग विभाग (डिपार्टमैंट) होते हैं। जैसे पुलिस-विभाग, कोर्ट, चुंगी-विभाग आदि। अगर किसी को रिपोर्ट करना है और वह जज के यहां रिपोर्ट भूल से करे तो जज यही कहेगा कि पुलिस थाने में रिपोर्ट करो। तात्पर्य यह है कि जैसे यहां पृथक-पृथक कार्य विभाग हैं उसी प्रकार देवताओं पर भी अलग-अलग विभागों का उत्तरदायित्व है। अपना जो अभीष्ट कार्य है, उसी के अधिकारी देवता की आराधना से कार्य सफल होगा। श्रीमद् भागवद द्वितीय स्कंध के तृतीय अध्याय में लिखा है कि जो प्राणी अपना सत्य बढ़ाना चाहे उसे ब्रह्माजी की पूजा-आराधना करनी चाहिए।


इंद्रियों को पुष्ट रखने के लिए इंद्र की पूजा आराधना करनी चाहिए।


धन की इच्छा वालों को लक्ष्मी जी की पूजा आराधना करनी चाहिए। 


तेज बढ़ाने के लिए अग्नि की पूजा आराधना करनी चाहिए।


अन्न, हाथी, घोड़ा आदि सवारी के इच्छुकों को आठों वसुओं की पूजा-आराधना करनी चाहिए।


स्वयं को सुंदर एवं रूपवान बनाने के लिए कामदेव की पूजा-आराधना करनी चाहिए।


बुद्धि के लिए रुद्र की, अधिक बल चाहने वालों को इलादेवी की पूजा-आराधना करनी चाहिए।


सुंदरता के लिए गंधर्व की पूजा-आराधना करनी चाहिए।


सुंदर स्त्री की कामना पूर्ति के लिए उर्वशी अप्सरा की पूजा-आराधना करनी चाहिए।


यश, र्कीत के लिए नारायण की पूजा-आराधना करनी चाहिए।


विद्या-लाभार्थ शंकर की पूजा-आराधना करनी चाहिए।


विशेष विद्या के लिए सरस्वती की पूजा-आराधना करनी चाहिए।


परिवार वृद्धि के लिए दिव्य पितरों की पूजा-आराधना करनी चाहिए।


परिवार की रक्षा के लिए पुण्यात्मा जीवों की पूजा-आराधना करनी चाहिए।


कला के अनुसार राज्य में पदोन्नति के लिए मनु की पूजा-आराधना करनी चाहिए।


शत्रु-नाश के लिए ‘विकट राक्षस’ की पूजा आराधना करनी चाहिए।


वीर्य वृद्धि के लिए चंद्रमा की पूजा-आराधना करनी चाहिए।


दीर्घायु चाहें तो अश्विनी कुमारों की पूजा-आराधना करें।


स्त्री सुंदर पति चाहे तो उसे पार्वती की पूजा-आराधना करनी चाहिए।


मुकद्दमा जीतने के लिए बगलामुखी की पूजा-आराधना करनी चाहिए।


कष्ट निवारण के लिए कामत्मिक दुर्गा देवी की आराधना करें।


सतीत्व वृद्धि के लिए सती सावित्री, सती अनुसुइया की पूजा-आराधना करनी चाहिए।


मर्यादा रक्षा के लिए श्री राम की पूजा-आराधना करनी चाहिए।


सुख-आनंद प्राप्ति के लिए श्री कृष्ण जी की पूजा-आराधना करनी चाहिए।


फोड़ा-फुंसी, रक्तविकार से बचाव के लिए श्री हनुमान जी की पूजा-आराधना करनी चाहिए।


लाटरी-सट्टा में सफलतार्थ स्वप्नेवरी देवी की पूजा-आराधना करनी चाहिए।


रोग निवारण के लिए श्री गंगा जी की आराधना करें।


आराधना, मंत्र-विधि आदि अपने निकटस्थ अनुभवी विद्वानों से जान लेनी चाहिए। पूजन स्वयं करना उत्तम होता है। यदि अन्य द्वारा पूजन कराएं तो यजमान यह देख लें कि वह व्यक्ति वास्तव में अनुभवी भी है या नहीं। कई बार मात्र वृद्ध या त्रिपुंडधारी बाबा को देख कर ही पूजा-पाठ करा बैठते हैं, जिससे लाभ होना असंभव  है।    



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