शनि दोष से पाना चाहते हैं मुक्ति, immediately अपनाएं ये उपाय

Friday, November 3, 2017 12:40 PM
शनि दोष से पाना चाहते हैं मुक्ति, immediately अपनाएं ये उपाय

शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है, जो व्यक्ति को उसके कर्मों के हिसाब से फल देेते हैं। जीवन में शनिदेव अगर अशांत हो तो जीवन में कष्टों का आगमन हो जाता है। जिस पर शनि देव की कुदृष्टि पड़ जाती है वह पल भर में राजा से रंक बन जाता है। अगर शनिदेव को प्रसन्न कर दिया जाए तो उनकी कृपा से व्यक्ति के समस्त दुख दूर हो जाते हैं। जानिए कुछ एेसे उपाय जिनको करने से न सिर्फ शनिदोष से मुक्ति मिलती है बल्कि शनिदेव अपने भक्त पर सदैव अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखते हैं।

 

*शनिवार को दिन स्नानादि कार्यों से निवृत्त होकर सफेद वस्त्र धारण करें। इसके बाद पीपल की जड़ में केसर, चंदन, चावल तथा फूल मिला कर जल अर्पित करें। 

 

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*तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें और इस मंत्र का जाप करें- 

आयु प्रजा धनं धान्यं सौभाग्यं सर्वसम्पदम्
देहि देव महावृक्ष त्वामहं शरण गतः
विश्वाय विश्वेश्वराय विश्वसम्भावाय विश्वपतेय गोविन्नदय नमः

इसके उपरांत पीपल की परिक्रमा कर धूप दीपक कर आरती उतारें और बचा हुआ पानी 
घर में छिड़क लें। इस उपाय को करने से शनिदेव प्रसन्न हो घर में आने वाली समस्त नकारात्मक शक्तियों का नाश कर देते हैं। 

 

*शुक्रवार की रात काले चनों को पानी में भिगोएं। शनिवार को काले चनों के साथ जले हुए कोयले, हल्दी और लोहे के एक-एक टुकड़े को काले कपड़े में बांध कर पानी में प्रवाहित करें। इस बात का ध्यान रखें कि जल में मछलियां हों। इस प्रक्रिया को एक साल तक हर शनिवार को करने से शनिदेव के अशुभ प्रभाव के कारण उत्पन्न हुई बाधाएं समाप्त हो जाती हैं।

 

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 *काले चनों को सरसों के तेल में छौंक लगाकर शनि देव को भोग लगाएं और अपनी समस्याअों के निवारण हेतु प्रार्थना करें। इस उपाय से शनि देव तुरंत प्रसन्न होते है और भाग्य अनुकूल बनता है।

 

*शनिवार के दिन हाथ की लंबाई का 19 गुणा लंबा एक काला धागा लें उसे एक माला के रूप में बनाकर अपने गले में धारण करें। इससे शनिदेव कृपावान होते हैं।

 

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*शनिवार के दिन शनि देव के 108 नामों का स्मरण करने से बड़े-बड़े संकट टल जाते हैं और मनचाही इच्छा पूरी होने के योग बनने लगते हैं। 

 

*शनिवार को हनुमान जी की पूजा कर चमेली के तेल में सिंदूर मिला कर चौला चढ़ाएं। इसके बाद लाल गुलाब के फूल अर्पित कर चूरमे का भोग लगाएं।

 

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