देश ही नहीं विदेशों में भी विख्यात है ये मंदिर, पूर्ण होती हैं मनोकामनाएं

Saturday, February 25, 2017 4:38 PM
देश ही नहीं विदेशों में भी विख्यात है ये मंदिर, पूर्ण होती हैं मनोकामनाएं

छतीसगढ़ से धमतरी जिले में नए बस सटैंड से 2 किलोमीटर दूर माता विंध्यवासिनी देवी का मंदिर स्थित है। मान्यता के अनुसार माता यहां धरती फाड़कर प्रकट हुई थी। जिसके कारण इसे स्वयं-भूं विंध्यवासिनी माता कहते हैं। माता की ख्याति देश ही नहीं विदेशों में भी विख्यात है। यहां मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। शास्त्र वेद भागवत पुराण के अनुसार विंध्यवासिनी माता श्री कृष्ण की बहन है। 

 

कहा जाता है कि ये क्षेत्र पहसे घनघोर जंगल था। एक बार राजा नरहर देव अपनी राजधानी कांकेर से सैनिकों के साथ यहां शिकार खेलने आए। जब राजा के सैनिक आगे बढ़ रहे थे तो अचानक सभी वहां रुक गए। अधिक प्रयास करने के बाद भी वे आगे न बढ़ सके। राजा अौर सैनिक वापस चले गए। जब वे दूसरे दिन वहां आए तब भी ऐसा ही हुआ। राजा ने सेनापति को कहा कि इस स्थान पर ऐसा क्या है, पता करें। सैनिकों ने जांच की तो पाया कि एक असाधारण पत्थर तेजमयी आकर्षक, मनमोहक, मंत्रमुग्ध है। उसके आस-पास जंगली बिल्लियां बठी थी। राजा को सूचित किया गया। राजा भी उस पत्थर को देख कर आकर्षित हो गए। 

 

राजा ने आदेश दिया कि इसे यहां से हटाकर राजधानी में स्थापित करें। सैनिकों ने राजा का आदेश पाकर खुदाई करनी शुरु कर दी। अचानक वहां से जल की धारा निकलनी शुरु हो गई। जिसके कारण खुाई रोक दी गई। रात में राजा को देवी ने स्वप्न दिया कि मुझे यहां से न ले जाए, मैं यहां से नहीं जाऊंगी, तुम्हारे सारे प्रयास विफल होंगे। मेरी पूजा यहीं पर की जाए। यही संसार के लिए मंगलमय, कल्याणकारी मनोकामना पूर्ण रहेगा। ऐसा करने से मेरा आशीर्वाद सभी को मिलेगा। यहां सर्वप्रथम गोंड राजा के शासनकाल में मंदिर का निर्माण किया गया। यहां पर देश ही नहीं विदेशों से भी भक्त माता के दर्शनों हेतु आते हैं। 


 



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