वास्तुशास्त्र में है फ्लोर की भी अहम भूमिका

Tuesday, January 23, 2018 6:02 PM
वास्तुशास्त्र में है फ्लोर की भी अहम भूमिका

वास्तुशास्त्र में मानव जीवन के हित लिए बहुत सी जरूरी बातें बताई गई है, जिन पर अमल करने से व्यक्ति की परेशानियां दूर होती है। इनमें एक है फ्लोर से संबंधित। यह भी घर के माहौल और एनर्जी में अहम भूमिका निभाता है। जानतें है फ्लोरिंग से जुडी कुछ खास वास्तु टिप्स जिनका ध्यान रखकर घर को हर बुरे प्रभाव से बचाया जा सकता है।

घर के मुख्य द्वार या सीढ़ियों के पास टूटा फ्लोर खुशहाली और धन लाभ बढ़ाने वाली एनर्जी को रोकता है। अगर घर-दूकान में ऐसा हो तो जल्दी से इसे ठीक करवा लें, वरना लगातार नुकसान का सामना करना पड़ सकता हैं।


अगर दीवारों का रंग डार्क है तो फर्श पर व्हाइट या ऑफ व्हाइट मार्बल यूज करना चाहिए। इससे परफैक्ट कलर बैलेंस बनता है और यह कलर बैलेंस घर को कई नुकसानों से बचाता है।

सीढ़ियों पर वूडन फ्लोरिंग का इस्तेमाल करना चाहिए। ऐसा करना बहुत शुभ माना जाता है। चूंकि सीढ़यां दो फ्लोर को कनेक्ट करती है, इसलिए इसमें वुड के यूज से संपन्नता और समृद्धि आती है।

घर दूकान के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में येलो स्टोन का प्रयोग करना चाहिए। इस दिशा में थोड़ा भी येलो स्टोन लगा दिया जाए तो पैसों की बरकत बनी रहती है।


 
घर-दूकान में बहुत ज्यादा डार्क कलर या प्रिंट वाले कार्पेट यूज न करें, ऐसा करने से नैगेटिव एनर्जी का प्रभाव बढ़ता हैं। साथ ही यह सुख-शांति को खत्म करता है।


घर-दुकान की दक्षिण दिशा में रैड नैचुरल स्टोन जैसे धौलपुर या लाल ईंट से कुछ न कुछ करवाना चाहिए। ऐसा करने से यहां के लोगों का मान-सम्मान बढ़ता है।


नैचुरल स्टोन पॉजिटिव एनर्जी अट्रैक्ट करते हैं। सिंथेटिक स्टोन के मुकाबले नेचुरल स्टोन से एनर्जी फ्लो बेहतर होता है। नेचुरल स्टोन या मार्बल नेगेटिव एनर्जी दूर रखते हैं।



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