बैकुंठ चतुर्दशी कल: इस मुहूर्त में करें पूजन, होगी बैकुंठ लोक की प्राप्ति

Wednesday, November 1, 2017 2:03 PM
बैकुंठ चतुर्दशी कल: इस मुहूर्त में करें पूजन, होगी बैकुंठ लोक की प्राप्ति

कल गुरुवार दि॰ 02.11.17 को कार्तिक शुक्ल चौदस के उपलक्ष्य में बैकुंठ चतुर्दशी पर्व मनाया जाएगा। बैकुंठ चतुर्दशी का वर्णन शास्त्र निर्णयसिन्धु, स्मृतिकौस्तुभ व पुरुषार्थ चिंतामणि में बताया गया है। कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी को स्वयं श्रीहरि ने वाराणसी में स्नान करके पाशुपत व्रत करके विश्वेश्वर की पूजा अर्चना की थी। तभी से इस दिन को 'काशी विश्वनाथ स्थापना दिवस' के रूप में मनाया जाता है। श्रीहरि ने एक हजार स्वर्ण कमल पुष्पों से विश्वनाथ के पूजन का संकल्प किया। अभिषेक के बाद जब वे पूजन करने लगे तो महेश्वर ने उनकी परीक्षा के उद्देश्य से महेश्वर ने एक कमल कम कर दिया। श्रीहरि को पूजन की पूर्ति करनी थी। एक पुष्प की कमी देखकर उन्होंने अपनी कमल समान आंख चढ़ाने को प्रस्तुत कर दी।


विष्णु की भक्ति से प्रसन्न होकर महेश्वर ने प्रकट होकर विष्णु को सर्वश्रेष्ट भक्त का वर दिया। यही कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी बैकुंठ चतुर्दशी कहलाती है। इस दिन व्रत पूर्वक जो विष्णु व शिव का पूजन करता है उसे बैकुंठ लोक की प्राप्ति होगी। दुर्घटना रहित जीवन की कामना रखने वाले को इस दिन श्री विष्णु का नाम स्मरण करना चाहिए। बेहतर नौकरी व कैरियर के लिए बैकुंठ चतुर्दशी के दिन नतमस्तक होकर भगवान विष्णु को प्रणाम करना चाहिए व सप्त ऋषियों का आवाहन उनके नामों से करना चाहिए।


विशेष पूजन विधि: पूर्वमुखी होकर हरि व हर का पूजन करें। गौघृत में केसर मिलाकर दीप करें, चंदन की अगरबत्ती करें, केसर चढ़ाएं। कमल का फूल चढ़ाएं, मखाने की खीर का भोग लगाएं तथा जल, इत्र, शक्कर, दही से अभिषेक करें और इन विशेष मंत्रों की 1-1 माला जाप करें। पूजन के बाद भोग गाय को खिला दें। 


पूजन मुहूर्त: रात 23:38 से रात 00:31 तक। निशिथा काल। 


पूजन मंत्र: ॐ ह्रीं ॐ हरिणाक्षाय नमः शिवाय॥


उपाय
बेहतर नौकरी व व कैरियर हेतु विष्णु मंदिर में 10 गोल पीले फल चढ़ाएं।


सुखी दांपत्य जीवन के लिए शिवलिंग पर चढ़ा शहद किसी संन्यासी को दान करें।


दुर्घटना से सुरक्षा के लिए जायफल सिर से वारकर शिवलिंग पर चढ़ाएं।

आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com



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