कल करें नाग देवता व नीलकंठ का पूजन, होगा समस्त बुराइयों का अंत

Sunday, February 4, 2018 8:02 AM
कल करें नाग देवता व नीलकंठ का पूजन, होगा समस्त बुराइयों का अंत

कल दि॰ 05.02.18 को फाल्गुन कृष्ण पंचमी, हस्त नक्षत्र व गजकरण है अतः कल नाग देवता का पूजन करना श्रेष्ठ रहेगा। यह दिन मूलतः नाग अर्थात सर्प देव को समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र अनुसार पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता है। पंचमी होने के कारण इस दिन धरती खोदने का कार्य नहीं किया जाता है। इस दिन विवाहित स्त्रियां अपनी संतान, घर-परिवार व अपने संचित धन की रक्षा हेतु नागदेव के निमित्त व्रत व पूजन करती है। यह पूजन मूलतः भगवान शंकर के नीलकंठ स्वरूप से जुड़ा है। सनातन संस्कृति में नागों से जुड़ी किंवदंती के अनुसार भगवान शिवशंकर ने समुद्र मंथन के दौरान सृष्टि को बचाने के लिए जहर हलहला विष का पान किया था। शास्त्रों में नौ नाग के नाम अनंत, वासुकी, शेष, पद्मनाभ, कंबला, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षशक व कालिया बताए गए हैं। इस दिन 9 नागों के नाम स्मरण करने व नीलकंठ महादेव के विशेष पूजन से स्वयं महादेव भक्त की सभी बुराइयों से रक्षा कर जीवन में विजयी बनाते हैं। घर परिवार की सुरक्षा होती है तथा संचित धन के नाश से मुक्ति मिलती है। 


विशेष पूजन विधि: शिवालय जाकर शिव परिवार का पंचोपचार पूजन करें। तिल के तेल का दीपक करें, सुगंधित धूप करें, सफेद फूल चढ़ाएं, चंदन से तिलक करें, दूध से अभिषेक करें, मावे के मिष्ठन का भोग लगाएं तथा 1 माला इस विशिष्ट मंत्र का जाप करें। पूजन के बाद भोग को पीपल के नीचे रख दें। 

पूजन मंत्र: ॐ भुजंगेशाय विद्महे, सर्पराजाय धीमहि, तन्नो नाग: प्रचोदयात्॥


पूजन मुहूर्त: प्रातः 10:00 से प्रातः 11:00 तक। 

 

उपाय
सौभाग्य प्राप्ति के लिए शिवलिंग पर चढ़ा चंदन मस्तक पर लगाएं।

पारिवारिक सुरक्षा हेतु शिवलिंग पर चढ़ा दूध पीपल पर चढ़ाएं।

धन की सुरक्षा के लिए शिवलिंग पर चढ़ी 9 कीलें घर की दक्षिण दिशा में छुपकर कर दें।


आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com

 



अपना सही जीवनसंगी चुनिए | केवल भारत मैट्रिमोनी पर- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन