छठा श्राद्ध आज: श्राद्ध हेतु श्रेष्ठ हैं तीन मुहूर्त, जानें विधि

Monday, September 11, 2017 7:01 AM
छठा श्राद्ध आज: श्राद्ध हेतु श्रेष्ठ हैं तीन मुहूर्त, जानें विधि

सोमवार दी॰ 11.09.17 आश्विन कृष्ण षष्ठी पर छठी का श्राद्ध मनाया जाएगा। मनुस्मृति में ऐसे लोग निंदित किए गए हैं जो अपने पितृगणों को भूल जाते हैं। शास्त्रनुसार सभी वर्णों व संप्रदायों में पितृयज्ञ करना अनिवार्य है। परंतु किसी कारण अगर श्राद्धकर्म छूट जाए तो उसके लिए गया श्राद्ध जैसे प्रावधान भी मनुस्मृति में वर्णित हैं। शास्त्रों ने देवकार्य से ज्यादा महत्व पितृकार्य का बताया गया है। देवगणों से पहले पितृगणों को प्रसन्न करना ज़रूरी है। गरुड़ पुराण के अनुसार समयानुसार श्राद्ध करने से कुल में कोई दुखी नहीं रहता। पितृपक्ष में किए गए कार्यों से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है तथा श्राद्धकर्ता को पितृऋण से मुक्ति मिलती है। षष्ठी का विधिवत श्राद्ध करने से सकल कार्य सिद्ध होते हैं तथा रोगों से मुक्ति मिलती है। 


षष्ठी श्राद्ध मुहूर्त: सोमवार दी॰ 11.09.17, चंद्र मेष राशि व भरिणी नक्षत्र में रहेगा। पंचमी तिथि सोमवार दी॰ 11.09.17 को प्रातः 05:23 से शुरू होकर मंगलवार दी॰ 12.09.17 को प्रातः 03:14 तक रहेगी। राहुकाल प्रातः 07:40 से प्रातः 09:12 तक है जिसमें श्राद्धकर्म वर्जित है। ऐसे में व्यवस्था है कि राहुकाल से बाद तर्पण व पिण्डदान करें। श्राद्ध हेतु श्रेष्ठ तीन मुहूर्त हैं, कुतुप दिन 11:52 से दिन 12:42 तक, रौहिण दिन 12:42 से दिन 13:31 तक, अपराह्न दिन 13:31 से शाम 15:59 तक।


षष्ठी श्राद्ध विधि: षष्ठी श्राद्धकर्म में छ: ब्राहमणों को भोजन कराने का मत है। श्राद्ध में गंगाजल, कच्चा दूध, तिल, जौ व खंड मिश्रित जल की जलांजलि देकर पितृ पूजन करें। पितृगण के निमित, गौघृत का दीप करें, चंदन धूप करें, सफ़ेद फूल, चंदन, सफ़ेद तिल व तुलसी पत्र समर्पित करें। चावल के आटे के पिण्ड समर्पित करें। फिर उनके नाम का नैवेद्य रखें। कुशा के आसन में बैठाकर पितृ के निमित भगवान विष्णु के जगन्नाथाय स्वरूप का ध्यान करते हुए गीता के छठे आध्याय का पाठ करें व इस विशेष पितृ मंत्र का यथा संभव जाप करें। इसके उपरांत चावल की खीर, पूड़ी पनीर की सब्ज़ी, कलाकंद, सफ़ेद फल, लौंग-ईलायची व मिश्री अर्पित करें। भोजन के बाद ब्राहमणों को सफ़ेद वस्त्र, चावल, शक्कर व दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें।


विशेष पितृ मंत्र: ॐ जगन्नाथाय नमः॥


आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com




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