स्वर्ग के अधिकारी बनना है तो कल नहाने से लेकर भोजन तक रखें ध्यान

Tuesday, March 7, 2017 1:47 PM
स्वर्ग के अधिकारी बनना है तो कल नहाने से लेकर भोजन तक रखें ध्यान

कल 8 मार्च को फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की तिथि है, जिसे आमलकी एकादशी नाम से जाना जाता है। आमलकी का शाब्दिक अर्थ है आंवला, यानि ये एकादशी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी अक्षय नवमी। जैसे अक्षय नवमी पर आंवला पूजन अक्षय पुण्यों का भागी बनाता है, उसी प्रकार आमलकी एकादशी पर भी आंवले के वृक्ष के नीचे श्री हरि विष्णु की पूजा करने से पुण्य प्राप्त होते हैं। आमलकी एकादशी के दिन आंवला वृक्ष को छूने से दुगुना व इसके सेवन से तिगुना पुण्य मिलता है। आंवला वृक्ष के मूल भाग में विष्णु, ऊपर ब्रह्मा, तने में रुद्र, शाखाओं में मुनिगण, टहनियों में देवता, पत्तों में वसु, फूलों में मरुदगण और फलों में समस्त प्रजापति वास करते हैं। यदि आपके आस-पास कहीं भी आंवले का वृक्ष न हो तो आंवले के फल श्रीराधाकृष्ण मंदिर अथवा विष्णुलक्ष्मी मंदिर में अर्पित करें। इस दिन किया गया व्रत-उपवास स्वर्ग का अधिकारी बनाता है और मोक्ष प्राप्ति का साधन बनता है।


अमालकी एकादशी के दिन सुबह नहाने के पानी में आंवले का रस मिलाकर नहाएं। ऐसा करने से आपके इर्द-गिर्द जितनी भी नेगेटिव ऊर्जा होगी वह समाप्त हो जाएगी। सकारात्मकता और पवित्रता में बढ़ौतरी होगी। फिर आंवले के पेड़ का पूजन करें। इस तरह मिलेंगे पुण्य, कटेंगे पाप।

 
शास्त्र कहते हैं आमलकी एकादशी के दिन आंवले का सेवन करने से पापों का नाश होता है। आंवला जरूर खाएं और दान भी करें। पुराणों के अनुसार आंवले का रस हर रोज पीने से पुण्यों में बढ़ौतरी होती है और पाप नष्ट होते हैं।


घी का दीपक जलकार विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। 

 
विशेष: आंवले खाने के 2 घंटे बाद तक दूध नहीं पीना चाहिए।


शाम को तुलसी के पौधे पर दीप अर्पित करके एकादशी माता की आरती अवश्य करें

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥
ॐ जय एकादशी...॥
 
तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी॥
ॐ जय एकादशी...॥
 
मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई॥
ॐ जय एकादशी...॥
 
पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है।
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै॥
ॐ जय एकादशी...॥
 
नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै॥
ॐ जय एकादशी...॥
 
विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी।
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की॥
ॐ जय एकादशी...॥
 
चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली।
नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली॥
ॐ जय एकादशी...॥
 
शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।
नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी॥
ॐ जय एकादशी...॥
 
योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी॥
ॐ जय एकादशी...॥
 
कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए॥
ॐ जय एकादशी...॥
 
अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला॥
ॐ जय एकादशी...॥
 
पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी॥
ॐ जय एकादशी...॥
 
देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं विनती पार करो नैया॥
ॐ जय एकादशी...॥
 
परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥
ॐ जय एकादशी...॥
 
जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै॥
ॐ जय एकादशी...॥




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