देवभूमि में विराजमान हैं मां संतानदात्री, जहां सोने से भरती है सूनी गोद

Thursday, June 8, 2017 11:32 AM
देवभूमि में विराजमान हैं मां संतानदात्री, जहां सोने से भरती है सूनी गोद

भारतवर्ष में अनेक शक्ति पीठ हैं। देवभूमि में एक एेसा शक्तिपीठ है जहां नि:संतान महिलाओं को संतान सुख प्राप्त होता है। यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी तहसील लडभडोल के सिमस गांव में स्थित है। जोकि बैजनाथ से 30.कि.मी. की दूरी पर स्थित है। यहां हर वर्ष संतान सुख पाने के लिए हजारों महिलाएं भारतवर्ष के हर राज्य से यहां आती हैं। मां शारदा सिमसा को संतानदात्री के रूप में जाना जाता है।
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प्रत्येक वर्ष यहां दंपति संतान प्राप्ति की इच्छा लेकर आते हैं। नवरात्रों में यहां विशेष समारोह होता है। स्थानीय भाषा में इसे सलिन्दरा कहते हैं। सलिन्दरा अर्थात स्वप्न आना। नवरात्रों के अवसर पर स्त्रियां मंदिर में आकर दिन-रात यहां के फर्श पर सोती हैं। माना जाता है कि जो स्त्रियां सच्चे मन अौर श्रद्धा से इस मंदिर में आती हैं, उन्हें स्वप्न में मां सिमसा मानव या प्रतीक रूप में दर्शन देकर संतान प्राप्ति का आशीर्वाद देती हैं। 
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माना जाता है कि सपने में स्त्रियों द्वारा स्वयं को कंद-मूल या फल मिलते देखने पर उन्हें संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। मां सिमसा सपने में पुत्र या पुत्री होने का भी संकेत दे देती हैं। सपने में स्त्री को अमरुद मिले तो उसे पुत्र प्राप्ति होती है। यदि स्वप्न में भिंडी मिले तो पुत्री होती है। इसके अतिरिक्त धातु, लकड़ी या पत्थर से निर्मित वस्तु मिले तो उसे संतान प्राप्ति नहीं होती है। कहा जाता है कि जिस स्त्री को नि:संतान बने रहने का सपना आए फिर भी वह वहां से अपना बिस्तर न हटाए तो उसके शरीर में खारिश होती है अौर लाल दाग उभर आते हैं। फिर उसे विवश हो वहां से जाना पड़ता है। नवरात्रों में नि:संतान दंपति व अन्य श्रद्धालुओं की यहां काफी भीड़ लगती है। नवरात्रों में शारदा माता मंदिर कमेटी की तरह से नि:शुल्क भोजन, रहने की व्यवस्था,  उचित भंडारा व सऱाएं की सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है। 
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सिमसा शारदा माता पिंडी रूप में विराजमान है। यह मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराना है और माता द्वारा संतान देने का सिलसिला भी 400 वर्षों से चला आ रहा है। यहां स्थानीय लोगों सहित पंजाब, हरियाणा, दिल्ली व अन्य राज्यों से भी बहुत से श्रद्धालु माता का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। संतान होने के पश्चात लोग अपने पारिवारिक सदस्यों अौर सगे-संबंधियों के साथ माता रानी का धन्यवाद करने आते हैं।
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मंदिर की एक विशेष बात यह है कि इसके समीप एक शिला है, जो बहुत प्रसिद्ध है। यह शिला दोनों हाथों से हिलाने पर भी नहीं हिलती परंतु हाथ की छोटी ऊंगली से हिलाने पर यह हिल जाती है। मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर दूर खूबसूरत स्थान है, जिसे कुड्ड के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि इस जगह पर भगवान शिव ने कुछ समय तपस्या की थी।
 




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