हनुमान जी ने यहां फेंका था शनिदेव को, तेल अर्पित कर गले मिलने से होते हैं कष्ट दूर(Pics)

Saturday, March 4, 2017 9:21 AM

मध्य प्रदेश में ग्वालियर के पास शनिदेव का मंदिर स्थित है। इसे देश के अन्य मंदिरों में से सबसे प्राचीन शनि मंदिर माना जाता है। कहा जाता है कि महाराष्ट्र के शिगनापुर शनि मंदिर में प्रतिष्ठित शनि शिला भी इसी शनि पर्वत से ले जाई गई थी। 

प्राचीन कथा के अनुसार रावण ने शनिदेव को कैद कर रखा था। जब हनुमान जी देवी सीता को ढूंढते हुए लंका गए तो उन्होंने वहां शनिदेव को रावण की कैद में देखा। रामभक्त हनुमान को देखकर शनिदेव ने उन्हें रावण की कैद से आजाद करवाने की प्रार्थना की। शनिदेव की प्रार्थना सुनकर हनुमान जी ने उन्हें लंका से कहीं दूर फेंक दिया ताकि शनिदेव कहीं सुरक्षित स्थान पर पहुंच जाएं। जब हनुमान जी ने शनिदेव को फेंका तो वे इस क्षेत्र में आकर प्रतिष्ठित हो गए। तब से यह स्थान शनिक्षेत्र के नाम से प्रसिद्ध हो गया। 

 

जब शनिदेव यहां आ कर गिरे तो उल्कापास सा हुआ। शिला के रूप में वहां शनिदेव के प्रतिष्ठत होने से एक बड़ा गड्ढा बन गया। ये गड्ढा आज भी मौजूद है। कहा जाता है कि हर शनिचरी अमावस्या को भक्त अपने कष्टों को लेकर यहां आते हैं। यहां शनिदेव को तेल अर्पित करने के बाद उनसे गले मिलने की परंपरा है। यहां आने वाले भक्त शनिदेव को तेल अर्पित कर उनके गले मिलते हैं अौर उनसे अपनी समस्याअों का जिक्र करते हैं। कहा जाता है कि ऐसा करने से शनिदेव उस व्यक्ति की सारी परेशानियों को दूर कर देते हैं। माना जाता है कि राजा विक्रमादित्य ने शनिदेव मंदिर का निर्माण करवाया था। 
 



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