सात्विकता और आचरण की शुद्धि का व्रत मोहिनी एकादशी

Thursday, May 4, 2017 9:03 AM
सात्विकता और आचरण की शुद्धि का व्रत मोहिनी एकादशी

वैशाख शुक्ल एकादशी यानी मोहिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना करने से जहां सुख-समृद्धि बढ़ती है वहीं शाश्वत शांति भी प्राप्त होती है। संसार में आकर मनुष्य केवल प्रारब्ध का भोग ही नहीं करता अपितु वर्तमान को भक्ति और आराधना से जोड़कर सुखद भविष्य का निर्माण भी करता है। इस बार मोहिनी एकादशी 6 मई को है। ये विचार गांव मुंकदसिंह वाला में आयोजित धार्मिक समागम दौरान प्रसिद्ध विद्वान एवं कथावाचक पंडित पूरन चन्द्र जोशी ने व्यक्त किए। पं. जोशी ने कहा कि एकादशी व्रत बहुत सावधानी का व्रत है। इसमें चावल वर्जित हैं। मोहिनी एकादशी के अवसर पर श्रद्धालुओं को सुबह से ही पूजा-पाठ, प्रात:कालीन आरती, सत्संग, एकादशी महात्म्य की कथा, प्रवचन सुनना चाहिए। साथ ही भगवान विष्णु को चंदन और जौ चढ़ाने चाहिएं क्योंकि यह व्रत परम सात्विकता और आचरण की शुद्धि का व्रत होता है। 


उन्होंने कहा कि स्कंद पुराण के अनुसार मोहिनी एकादशी के दिन समुद्र मंथन में निकले अमृत का बंटवारा हुआ था। स्कंद पुराण के अवंतिका खंड में शिप्रा को अमृतदायिनी, पुण्यदायिनी कहा गया। अत: मोहिनी एकादशी पर शिप्रा में अमृत महोत्सव का आयोजन किया जाता है। अवंतिका खंड के अनुसार मोहिनी रूपधारी भगवान विष्णु ने अवंतिका नगरी में अमृत वितरण किया था। यह दिन देवासुर संग्राम का समापन दिन भी माना जाता है। 



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