मनुस्मृति: इन लोगों के सामने आने पर स्वयं पीछे हटकर दें रास्ता

Monday, May 8, 2017 2:37 PM
मनुस्मृति: इन लोगों के सामने आने पर स्वयं पीछे हटकर दें रास्ता

मनुस्मृति को हिन्दू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण एवं प्राचीन धर्मशास्त्र माना गया है। स्वायंभुव मनु द्वारा लिखित शास्त्र मनुस्मृति भारतीय आचार-संहिता का विश्वकोश है। जिसमें 12 अध्याय और 2500 श्लोक हैं। इस ग्रंथ में ब्रह्मा जी के पुत्र मनु महाराज ने ऋषियों को उपदेश दिया है। इन नीतियों का पालन करने से व्यक्ति जीवन में कई लाभ प्राप्त कर सकता है। मनुस्मृति के एक श्लोक में कुछ ऐसे लोगों के बारे में बताया गया है कि जिनके सामने आ जाने पर उन्हें मार्ग देकर पहले जाने देना चाहिए।

श्लोक
चक्रिणो दशमीस्थस्य रोगिणो भारिणः स्त्रियाः।
स्नातकस्य च राज्ञश्च पन्था देयो वरस्य च।।


मनुस्मृति के अनुसार कहीं जाते समय सामने से कोई रथ पर सवार व्यक्ति आ जाए तो स्वयं पीछे हटकर उसे रास्ता दे देना चाहिए। रथ पहले समय में होते थे लेकिन आज सरकारी गाड़ी मान सकते हैं। जो व्यक्ति सरकार की अोर से समाज की सेवा के लिए नियुक्त होता है उसे सम्मान देना देना हर व्यक्ति का कर्तव्य है। 

यदि रास्ते में कोई वृद्ध पुरुष या स्त्री आ आए तो स्वयं पीछे हटकर उन्हें रास्ता दे देना चाहिए। बुजुर्ग लोगों को सदैव सम्मान देना चाहिए। उन्हें किसी भी परिस्थिति में अपमानित नहीं करना चाहिए। यदि हम वृद्ध पुरुष या स्त्री को मार्ग न देकर स्वयं आगे चले जाते हैं तो ये उन लोगों का अपमान जैसा माना जाएगा। 

रास्ते में रोगी व्यक्ति को मार्ग देना शिष्टता है। रोगी व्यक्ति उपचार के लिए जा रहा हो यदि हम उसे मार्ग नहीं देंगे तो उसके उपचार में देरी हो सकती है। जिससे रोगी को किसी विकट परिस्थिति का सामना करना पड़ सकता है। रोगी व्यक्ति की सेवा करना पुण्य माना जाता है इसलिए स्वयं हटकर रोगी व्यक्ति को मार्ग दे दना चाहिए। 

रास्ते में जाते समय यदि कोई बोझा उठाए आ जाए तो हमें उसे पहले जाने देना चाहिए। ऐसा हमें मानवीयता के कारण करना चाहिए। जिन लोगों के सिर या हाथों पर बोझ होता है, वह सामान्य स्थिति में खड़े मनुष्य से अधिककष्ट अनुभव कर रहा होता है । ऐसा स्थिति में व्यक्ति के मानवीयता का भाव रखते हुए मार्ग से स्वयं हटकर उन्हें पहले जाने देना चाहिए। 

मनुसमृति के अनुसार रास्ते में कोई स्त्री आ जाए तो उसे पहले जाने देना चाहिए। सनातन परंपरा में महिला को बहुत ही सम्माननीय माना गया है। व्यक्ति को किसी भी तरीके से स्त्री का अपमान नहीं करना चाहिए। स्त्री को मार्ग न गेकर स्वयं पहले चले जाना उसके अपमान जैसा है। स्त्री का अपमान करने से देवी लक्ष्मी व मां सरस्वती दोनों ही रुष्ट हो जाते हैं इसलिए महिला के मार्ग से हटकर उन्हें पहले जाने देना चाहिए। 

ब्रह्मचर्य आश्रम में रहते हुए गुरुकुल में सफलतापूर्वक शिक्षा पूरी करने वाले विद्यार्थी को एक समारोह में पवित्र जल से स्नान करा कर सम्मानित किया जाता था। इन्हीं विद्वान विद्यार्थी को स्नातक कहा जाता था। वर्तमान परिदृश्य में स्नातक को वेद व शास्त्रों का ज्ञान रखने वाला विद्वान माना जा सकता है। ऐसा व्यक्ति सामने आ जाए तो उसे पहले जीने देना चाहिए। ऐसा व्यक्ति समाज में ज्ञान की रोशनी फैलाता है। 

राजा सदैव प्रजा के हित के लिए निर्णय लेता है। राजा हर स्थिति में सम्माननीय होता है। जिस रास्ते पर आप जा रहे हों अौर सामने से राजा आ जाए तो स्वयं पीछे हट जाना चाहिए। 

यदि दूल्हा मार्ग में आ जाए तो पहले उसे जाने देना चाहिए। माना जाता है कि दूल्हा बना व्यक्ति भगवान शिव का स्वरूप होता है, उनका सम्मान करना चाहिए। जब भी कोई दूल्हा मार्ग पर आ जाए तो उसे मार्ग देकर स्वयं पीछे हट जाना चाहिए।



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