कामयाबी का मंत्र: न केवल लोक बल्कि परलोक में भी देगा मनचाही सफलता

Wednesday, January 3, 2018 2:27 PM
कामयाबी का मंत्र: न केवल लोक बल्कि परलोक में भी देगा मनचाही सफलता

ज्यादातर लोगों के साथ ऐसा होता है कि जिस भी कार्य को वह कर रहे होते हैं, उस समय उस काम पर नहीं, बल्कि उनका ध्यान कहीं और ही रहता है। जब किसी से बात कर रहे हैं तो वह भले ही उस व्यक्ति से बातें कर रहे हों, परंतु उस समय उनका ध्यान कहीं और ही होता है। ऐसे में उस व्यक्ति से बात भी पूरी नहीं हो पाती। ऐसे ही लोग जब भगवान की आराधना के लिए बैठते हैं तो उनका मन भागता है- ‘अरे मैं उससे यह बात कहना भूल गया। उससे मैंने यह नहीं कहा, अब यह भी करना है, उसकी चिट्ठी भेजनी है, वगैरह-वगैरह।’ 


यह कैसी भक्ति है। ऐसी भक्ति से इस जीवन के अंदर आनंद कैसे आएगा। अगर आपका ध्यान एकाग्र हो तो आपका सारा जीवन ही सुधर जाए। बैलगाड़ी का एक लक्ष्य है, उसके आगे बैल लगेंगे और उसमें सामान रखा जाएगा या कोई आदमी बैठेगा। उसको एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकती है। इसी तरह से नौका का क्या लक्ष्य है लोगों या चीजों को पानी में इस पार से उस पार ले जाना।


उसी प्रकार आपके जीवन का लक्ष्य धन इकट्ठा करना या अपना नाम उज्ज्वल करना नहीं, बल्कि उस परमानंद की अनुभूति करना है, जिसे आप आखिरी समय तक करते रह सकते हैं। मन तो सांसारिक पदार्थों की कामना करता रहता है परन्तु उससे आपका कुछ लेना-देना नहीं होना चाहिए। आपको उस परमपिता परमेश्वर से लेना-देना होना चाहिए, जो आपके हृदय के अंदर स्थित है। उसकी अनुभूति करना ही आपके जीवन का लक्ष्य है। मनुष्य का संसार में आना तब तक सफल नहीं होता जब तक कि वह परमानंद को पहचान कर उसका अनुभव न करे।


जब तक आपके जीवन के अंदर दृढ़ता नहीं होगी, जब तक आप अपना ध्यान केंद्रित कर अपने जीवन को नहीं चलाएंगे, तब तक आप कभी अपनी जिंदगी के अंदर कामयाब नहीं हो सकते। अगर आप अपने कार्य को ध्यान केंद्रित करके करेंगे तो उसमें आपको कामयाबी मिलेगी। आपका टाइम भी बचेगा और जिस काम को आप 8 घंटे में करते हैं, वह काम आप कहीं कम समय मेंं पूरा कर लेंगे। अगर बच्चे ध्यान केंद्रित करके पढ़ेंगे तो वे जरूर पास होंगे।



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