महेश नवमी कल: मोटे मुनाफे के साथ व्यापार में कमाएं लाभ

Friday, June 2, 2017 10:07 AM
महेश नवमी कल: मोटे मुनाफे के साथ व्यापार में कमाएं लाभ

कल शनिवार, 3 जून को भगवान शिव के पूजन का खास दिन महेश नवमी है। इस दिन भगवान महेश का लिंग रूप में विशेष पूजन करने से व्यापार में उन्नति होती है। इस दिन विधान पूर्वक भगवान महेश पर पृथ्वी के रूप में रोट चढ़ाया जाता है। शिवलिंग पर भस्म से त्रिपुंड लगाया जाता है जो त्याग व वैराग्य का सूचक है। इस दिन विशेषकर भगवान महेश के विविध तापों को नष्ट करने वाले त्रिशूल का विशिष्ट पूजन किया जाता है। शिव पूजन में डमरू बजाए जाते हैं। शिव का डमरू जनमानस की जागृति का प्रतीक है। महेश नवमी पर भगवान महेश की विशेषकर कमल के पुष्पों से पूजा कि जाती है। कमल कीचड़ में खिलता है, जल में रहता है, परंतु किसी में भी लिप्त नहीं होता है।


महेश नवमी पर भगवान महेश के इस मंत्र से मोटे मुनाफे के साथ व्यापार में कमाएं लाभ।

अर्थितव्यः सदाचारः सर्वशंभुमहेश्वरः। ईश्वरः स्थाणुरीशानः सहस्त्राक्ष सहस्त्रपात्॥


नोट: यह मंत्र लिंग पुराण के अंतर्गत शिव सहस्त्रनाम स्त्रोत्र से लिया गया है। यह मंत्र भगवान विष्णु का उवाच है।


माहेश्वरी समाज का प्रागट्य भगवान महेश के आशीर्वाद से हुआ है। वैसे तो महेश नवमी का उत्सव समस्त समाज के लोग अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुरूप मनाते हैं लेकिन महेश नवमी का त्यौहार माहेश्वरी समाज द्वारा खूब धूमधाम से मनाया जाता है। माना जाता है की माहेश्वरी समाज पूर्वकाल में क्षत्रिय वंश से थे लेकिन किसी पूर्वज से हुई भुल के कारण ऋषियों ने उन्हें श्राप दे दिया। आज ही के दिन भगवान महेश ने उन्हें श्राप के प्रभाव से मुक्त कर अपना नाम दिया था। यह भी माना जाता है कि भगवान महेश से आज्ञापत्र पाकर माहेश्वरी समाज के पूर्वजों ने क्षत्रिय कर्म का त्याग कर वैश्य अथवा व्यापारिक कामों को अपनाया।


भगवान महेश ने कभी भी किसी के साथ भेदभाव नहीं किया। किसी भी जाति-धर्म को महत्व नहीं दिया उनके लिए सब समान हैं, विशेष है तो केवल श्रद्धा व भाव, जो जिस श्रद्धा के साथ भगवान का ध्यान करते हैं, भगवान भी उनका उतना ही ध्यान रखते हैं।  भगवान शिव के बारे में कहा जाता है कि इनकी पूजा-आराधना में कर्मकांड की उतनी आवश्यकता नहीं, फिर भी कर्मकांड का अपना महत्व है जो अपना फल देता है।


आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com




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