कन्याकुमारी जहां तीन समुद्र पखारते हैं भारत माता के चरण: स्वामी ज्ञानानंद

Wednesday, January 10, 2018 10:01 AM
कन्याकुमारी जहां तीन समुद्र पखारते हैं भारत माता के चरण: स्वामी ज्ञानानंद

गीता सत्संग सद्भावना यात्रा 5वें दिन कन्याकुमारी पहुंची


कन्याकुमारी/पठानकोट, (तिलक, आदित्य): गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के सान्निध्य में गीता सत्संग सद्भावना यात्रा 5वें दिन मंगलवार को कन्याकुमारी पहुंची। कन्याकुमारी पहुंचते ही स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने इस धरती को नमन किया। उन्होंने सैंकड़ों भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत माता के चित्र पर यदि ध्यान से देखें तो अनुभव होगा हिमाचल भारत माता के चित्र हैं तथा कन्याकुमारी इसके चरण। यह भी एक दिव्य संयोग है कि तीन-तीन समुद्र (हिंद महासागर, अरब सागर एवं बंगाल की खाड़ी) एक साथ भारत माता के चरणों को पखारते हुए यहां अनुभव होते हैं। 


कन्याकुमारी में जहां एक ओर शक्तिपीठ के रूप में कन्याकुमारी के दर्शनों की दिव्यता है, वहीं समुद्र के भीतर स्थित विवेकानंद रॉक के रूप में सुंदर, सुरम्य और अत्यंत आलौकिक जहां एक ओर मां पार्वती का चरण चिन्ह दर्शनों के रूप में है। ऐसा कहा जाता है कि इस स्थान पर मां पार्वती ने दीर्घकाल तक एक पैर पर खड़े होकर तपस्या की थी, वहीं साथ ही साथ स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी के दर्शन और स्वामी विवेकानंद जी की एक दर्शनीय प्रतिमा भी है, जिसके दर्शन करके स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के संग सैंकड़ों भक्तों ने अपने आपको कृतार्थ किया। 


महाराज श्री के साथ आए ब्रह्माचारी शक्ति, ब्रह्माचारी रमेश, ब्रह्माचारी केशव, ब्रह्माचारी मनमोहन वासुदेव, पंजाब से सुदर्शन अग्रवाल, सतीश महेन्द्रू, अनिल वर्मा, अंबाला से अशोक चावला, पं. तिलक राज शर्मा, केवल चावला, मनमोहन कपूर, आशीष गुलाटी, केशव चावला, करनाल से रेणु बाला गुप्ता (मेयर करनाल), सोनीपत से जामिल, पेहवा से राजेन्द्र चोपड़ा, पठानकोट से मानव ने सत्संग सद्भावना यात्रा का नेतृत्व किया। बुधवार को यात्रा अंतिम पड़ाव त्रिवेन्द्रम में पद्मनाभम स्वामी मंदिर के दर्शनों का लाभ लेकर यात्रा उत्तर भारत की ओर प्रस्थान करेगी।



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