भारत की राष्ट्रीय अखंडता के साथ जुड़ी है तीर्थ परम्परा: स्वामी ज्ञानानंद

Saturday, January 6, 2018 9:25 AM
भारत की राष्ट्रीय अखंडता के साथ जुड़ी है तीर्थ परम्परा: स्वामी ज्ञानानंद

चेन्नई, (तिलक): श्री कृष्ण कृपा परिवार गीता मनीषी स्वामी श्री ज्ञानानंद जी महाराज के सान्निध्य में लगभग 700 से अधिक भक्तजन दक्षिण भारत की तीर्थ यात्रा पर सत्संग सद्भावना के उद्देश्य से शुक्रवार को चेन्नई के अम्मा ऑडिटोरियम में भक्तजनों को तीर्थ परम्परा के महत्व के बारे में बताते हुए गीता मनीषी ने कहा कि भारत एक  ऐसा देश है जिसमें हमारी आस्था साथ में जुड़ी है जिसका मुख्य कारण है भारत की परम्पराएं, जो समूचे विश्व में और कहीं नहीं। जैसे अवतार परम्परा, त्यौहार परम्परा, संत परम्परा, ग्रंथ परम्परा एवं तीर्थ परम्परा। यद्यपि सभी परम्पराओं का अपना प्रभाव है लेकिन तीर्थ परम्परा पूरे देश को भौगोलिक, सांस्कृतिक व आध्यात्मिक स्वरूप में बांधे रखने का दिव्य आधार है।

 

पूरे भारत का कोई क्षेत्र नहीं, कोई प्रांत नहीं जहां हमारी आस्था का कोई न कोई प्रामाणिक तीर्थ न हो। उन्होंने बताया कि मुख्य रूप से बात 4 धामों की है। चारों दिशाओं में स्थित ये 4 धाम पूरे देश को एकता, अखंडता समता और सद्भावना के रूप में एक किए हुए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर में बद्रीनाथ धाम, पूर्व में जगन्नाथ धाम, पश्चिम में द्वारका धाम, दक्षिण में रामेश्वरम्, इन चारों धामों की आध्यात्मिक महत्ता तो है ही लेकिन साथ ही साथ राष्ट्रीय एकता के लिए भी ये 4 धाम महत्वपूर्ण हैं।

 

कभी उत्तर भारत के लोग दक्षिण भारत में आते हैं और दक्षिण की संस्कृति को समझने का उन्हें अवसर मिलता है, कभी दक्षिण के उत्तर भारत में ऐसे ही चारों दिशाओं के लोग धाम यात्रा के लिए जाते हैं तो सबको लगता है कि हमारे भारत की यह दिव्यता कितनी महान है। महाराज श्री के साथ आए ब्रह्मचारी शक्ति, ब्रह्मचारी रमेश, ब्रह्मचारी केशव, वासुदेव पंजाब से सुदर्शन अग्रवाल, अम्बाला से अशोक चावला, जगाधरी से अनिल गर्ग, दिल्ली से विजय सिंघल, प्रदीप मित्तल, बेंगलूर से दिनेश गुप्ता, चेन्नई से शेखर आदि ने महाराज श्री के सान्निध्य में तीर्थ यात्रा का नेतृत्व किया।



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