एक जातक मांगलिक न भी हुआ तो शादी हो सकती है, जानिए कैसे

Wednesday, July 26, 2017 7:05 AM
एक जातक मांगलिक न भी हुआ तो शादी हो सकती है, जानिए कैसे

देश में सैंकड़ों युवा और युवतियां सिर्फ इस भर्म के कारण शादी नहीं कर पाते कि उन्हें बताया जाता है कि उनकी कुंडली में मांगलिक दोष है और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए उन्हें मांगलिक साथी के साथ ही शादी करनी पड़ेगी। जातक की कुंडली की व्याख्या करते समय अक्सर पंडित मंगल की स्थिती को देखकर ही मांगलिक होने का फैसला कर लेते हैं जबकि असलियत में ऐसा नहीं है और 70 फीसदी से अधिक मामलों में आपकी कुंडली का मांगलिक दोष रद्द हो जाता है। आज हम आपको बताएंगे कि किन हालातों में मंगल का दोष नहीं लगता और कुंडली में मांगलिक दोष रद्द हो जाता है।
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मांगलिक की परिभाषा
इस पहली कुंडली में आप देख रहे हैं कि मंगल यदि कुंडली के पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें और बारवें घर में यदि मंगल है तो मांगलिक दोष माना जाता है। इसके इलावा चंद्र कुंडली में नवमांश में भी यदि मंगल इन्हीं घरों में हो तो मांगलिक दोष लगता है। इस कुंडली में हमने कोई राशि नहीं रखी है और इस कुंडली के मुताबिक इन घरों में मंगल होने पर मांगलिक दोष बनेगा। 


मंगल दोष रद्द, उदाहरण 1
ये कुंडली एक लग्न की है यानि ज्योतिष की भाषा में इसे मेष लग्न की कुंडली कहा जाएगा। अब इस कुंडली में मंगल पहले, चौथे, आठवें और बारवें भाव में हुआ तो मंगल दोष खुद ब खुद रद्द हो जाएगा क्योंकि मेष राशि व वृश्चिक राशि मंगल की अपनी राशि है और अपनी राशि का मंगल मांगलिक दोष नहीं देता। इस कुंडली में चौथे भाव में बैठा मंगल चंद्रमा की कर्क व बारहवें भाव में बैठा मंगल बृहस्पति की राशि में हैै। लिहाजा मेष लग्न में छः में से चार घरों पर बैठे मंगल पर मागलिक दोष रद्द हो गया है। इस लग्न में सिर्फ दूसरे व सातवें भाव में बैठे मंगल पर ही मांगलिक दोष बनता है। 

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उदाहरण 2
इस दूसरे उदाहरण में जातक की कुंडली चार राशि यानि कि कर्क लग्न की है। कर्क और सिंह लग्न में मंगल एक केंद्र और एक त्रिकोण का मालिक होकर योगा कारक ग्रह हो जाता है। लिहाजा कर्क और सिंह लग्न की कुंडली में जातक को मांगलिक दोष नहीं लगता। इस कुंडली में मंगल पांचवें (त्रिकोण में वृश्चिक राशि) और दसवें (केंद्र में मेष राशि) का स्वामी है लिहाजा यहां मंगल दोष नहीं लगेगा।  

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उदहारण 3 
ये तीसरी कुंडली मीन लग्न की है और इस कुंडली में लग्न का स्वामी बृहस्पति है और बृहस्पति मजबूत हो कर अपनी राशि में लग्न में बैठा है। लिहाजा इस लग्न में लग्न के मंगल पर मांगलिक दोष नहीं लगेगा। मीन लग्न में दूसरे भाव में बैठा मंगल अपनी मेष राशि में आ जाएगा। लिहाजा दूसरे घर के मंगल पर भी मांग्लिक दोष रद्द हो जाएगा। इसी लग्न में चौथे भाव में बैठा मंगल बुद्ध की राशि मिथुन में आ गया है लिहाजा यहां भी मंगल दोष नहीं लगेगा। सातवें घर में मंगल के साथ चंद्रमा है और मंगल पर बृहस्पति की दृष्टि भी है। लिहाजा सातवें घर के मांगल का मांगलिक दोष भी रद्द हो गया है। 

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उदहारण 4
तुला लग्न की इस चौथी कुंडली में लग्न में बैठा मंगल सूर्य के साथ है लिहाजा लग्न का मांगलिक दोष रद्द हो गया है। इस कुंडली में चौथे भाव में बैठा मंगल मकर राशि में जाकर उच्च का मंगल हो गया है और बुध के साथ बैठा है लिहाजा यहां चौथे भाव के मंगल से मांगलिक दोष नहीं लगेगा। यहां आठवें भाव में मगल शनि और बारवें भाव में मंगल राहू के साथ बैठा है लिहाजा मांगलिक दोष यहां भी रद्द हो जाएगा। 

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ऐसे भी रद्द हो जाता है मांगलिक दोष
कुंभ लग्न की कुंडली में मंगल यदि चौथे और आठवें घर में हो तो मांगलिक दोष नहीं लगता। 


लग्न में शुभ बृहस्पति या शुक्र बैठें हों तो मांगलिक दोष रद्द हो जाता है। 


धनु और मीन लग्न की कुंडली में आठवें घर में बैठे मंगल से मांगलिक दोष नहीं लगता। 


बाहरवें घर में मंगल यदि शुक्र की राशि वृष या तुला में हो तो मंगल दोष नहीं लगता। 


दूसरे घर में मिथुन या कन्या राशि में बैठा मंगल भी मांगलिक दोष नहीं देता।


नोटः यदि आपकी कुंडली में मांगलिक दोष है और आपकी कुंडली में उसी घर में मंगल के सामने शनि, बृहस्पति, राहू या केतू ग्रह बैठे हैं तो मांगलिक दोष अपने आप रद्द हो जाएगा। ऐसे स्थिती में एक जातक मांगलिक न भी हुआ तो शादी हो सकती है। 

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