तीन कसौटियां को करें व्यवहार में शामिल, हर कोई बंध जाएगा आपके आकर्षण में

Monday, March 20, 2017 3:04 PM
तीन कसौटियां को करें व्यवहार में शामिल, हर कोई बंध जाएगा आपके आकर्षण में

प्राचीन यूनान में सुकरात अपने ज्ञान और विद्वता के लिए बहुत प्रसिद्ध था। सुकरात के पास एक दिन उसका एक परिचित व्यक्ति आया और बोला, ‘‘मैंने आपके एक मित्र के बारे में कुछ सुना है।’’ 


ये सुनते ही सुकरात ने कहा, ‘‘दो पल रुकें’’,  मुझे कुछ बताने से पहले मैं चाहता हूं कि हम एक छोटा-सा परीक्षण कर लें जिसे में  ‘तीन कसौटियों का परीक्षण’ कहता हूं। 


तीन कसौटियां? कैसी कसौटियां? परिचित ने पूछा। ‘हां’, सुकरात ने कहा, ‘‘मुझे मेरे मित्र के बारे में कुछ बताने से पहले हमें यह तय कर लेना चाहिए कि आप कैसी बात कहने जा रहे हैं, इसलिए किसी भी बात को जानने से पहले मैं इन कसौटियों से परीक्षण करता हूं। इसमें पहली कसौटी सत्य की कसौटी है। क्या आप सौ फीसदी दावे से यह कह सकते हैं कि जो बात आप मुझे बताने जा रहे हो वह पूर्णत: सत्य है? नहीं,’’ परिचित ने कहा, ‘‘दरअसल मैंने सुना है किष्ठ’’ 


ठीक है, सुकरात ने कहा, ‘‘इसका अर्थ यह है कि आप आश्वस्त नहीं हैं कि वह बात पूर्णत: सत्य है। चलिए, अब दूसरी कसौटी का प्रयोग करते हैं जिसे मैं अच्छाई की कसौटी कहता हूं। मेरे मित्र के बारे में आप जो भी बताने जा रहे हैं क्या उसमें कोई अच्छी बात है?’’ नहीं, बल्कि वह तोष्ठ, परिचित ने कहा।

 

अच्छा, सुकरात ने कहा, ‘‘इसका मतलब यह है कि आप मुझे जो कुछ सुनाने वाले थे उसमें कोई भलाई की बात नहीं है और आप यह भी नहीं जानते कि वह सच है या झूठ लेकिन हमें अभी भी आस नहीं खोनी चाहिए क्योंकि आखिरी यानी तीसरी कसौटी का एक परीक्षण अभी बचा हुआ है, और वह है उपयोगिता की कसौटी। जो बात आप मुझे बताने वाले थे, क्या वह मेरे किसी काम की है?’’ नहीं, ऐसा तो नहीं है।

 

परिचित ने असहज होते हुए कहा, ‘‘बस हो गया’’, सुकरात ने कहा, ‘‘जो बात आप मुझे बताने वाले थे वह न तो सत्य है, न ही भली है, और न ही मेरे काम की है, तो मैं उसे जानने में अपना कीमती समय क्यों नष्ट करूं?’’ 




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