ब्रज में बिखरा गुलाल, हुरियारे सज व राधिकाएं लठ संभाल हुई तैयार

Wednesday, March 8, 2017 11:21 AM
ब्रज में बिखरा गुलाल, हुरियारे सज व राधिकाएं लठ संभाल हुई तैयार

समूचे भारत में होली 13 मार्च को मनाई जाएगी लेकिन ब्रज में अभी से अबीर-गुलाल चारों अोर बिखर रहा है। बरसाने में होली की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। नंदगांव के लोग रंग-बिरंगे वस्त्र पहनकर हाथों में लठ लेकर बरसाना रवाना हो रहे हैं। ये लोग लठ इसलिए लेते हैं ताकि खुद को बरसाने की राधिकाअों से खुद को बचा सके। वहीं बरसाने की राधिकाएं भी सोलह श्रृंगार करके तैयार रहती हैं। नवमी के दिन राधारानी के बुलावे पर नंदगांव के हुरियार बरसाना में होली खेलने जाते हैं। वहीं दशमी के दिन बरसाना के हुरियार नंदगांव की हुरियारिनों से होली खेलने जाते हैं। उसके बाद नंद चौक पर होली के रसिया गायन के मध्य लठमार होली होती है। कहा जाता है कि जब नंदगाव की टोलियां बरसाना आती हैं तो वहां की महिलाएं उन पर लाठियां बरसाती हैं अौर पुरुषों को उन लाठियों से बचना होता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि होली की लाठियों से किसी को चोट नहीं लगती। यदि किसी को चोट लगती है तो घाव पर मिट्टी लगाकर फिर से होली खेलने लग जाते हैं। उस समय भांग अौर ठंडाई का इंतजाम होता है। 

 

ग्वाले बरसाने या नंदगांव में होली खेलने ऐसे ही नहीं जाते। उन्हें होली खेलने के लिए निमंत्रण दिया जाता है। बरसाने की हुरियारिन परंमपरागत तरीके से नंदगांव में कान्हा से होली खेलने के लिए हांडी में गुलाल, इत्र, मठरी, पुआ आदि मिठाई लेकर निमंत्रण देने जाती हैं। वहां उनका निमंत्रण स्वीकार करते हुए समाज के अन्य लोगों को बताया जाता है। बरसाने में लठमार होली से पूर्व शाम को लड्डूअा होली खेली जाती है। मंदिर में लोग एकत्रित होकर रसिया गाकर एक दूसरे को लड्डू मारते हैं। नंदगाव के लोग निमंत्रण स्वीकार कर यहां पंडा लाते हैं। ये सूचना जब लोगों को लगती है तो सभी नाच-गाकर एकत्रित होते हैं। लोग छतों पर खड़े होकर लड्डूअों की बरसात करते हैं। देश-विदेश से लोग लड्डूअों का प्रसाद लेने के लिए यहां आते हैं।

 

8 मार्च से वृंदावन के ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में भी होली होने लगती है। कहा जाता है कि इस मौके पर ठाकुर जी वर्ष में एक बार मंदिर परिसर में आकर भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी दिन वृंदावन से सभी बाजारों से होकर ठा. राधावल्लभ लाल के चल विग्रह का हाथी पर डोला पारंपरिक रूप में निकाला जाता है और मथुरा में जन्मस्थान के लीलामंच एवं प्रांगण में होली के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। बताया जा रहा है कि उसके बाद 9 मार्च को गोकुलवासी छड़ी मार होली खेलेंगे। 13 मार्च को मथुरा के ठा. द्वारिकाधीश मंदिर से ठाकुर जी का डोला निकाला जाएगा। यह शहर के सभी प्रमुख बाजारों में होता हुआ पुन: वहीं पहुंचकर यात्रा पूर्ण करेगा। 

 

14 मार्च को राधारानी के ननिहाल गांव मुखराई में विश्व प्रसिद्ध चरखुला नृत्य का आयोजन किया जाता है। चरखुला नृत्य में गांव की महिलाएं करीब 50 किलो वजनी रथ के पहिएनुमा चक्र, जिस पर सैकड़ों दीपक प्रज्वलित रहते हैं, अपने सिर पर रखकर नृत्य करती हैं।
 



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