बरुथनी एकादशी व्रत 22 और 23 अप्रैल को

Saturday, April 22, 2017 9:25 AM
बरुथनी एकादशी व्रत 22 और 23 अप्रैल को

वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी बरुथनी नाम से प्रसिद्ध है तथा इस बार यह पुण्यदायिनी एवं सौभाग्यदायिनी एकादशी व्रत 22 और 23 अप्रैल को है। धर्मसिंधू के अनुसार एकादशी 2 प्रकार की होती है- विद्धा और शुद्धा। दशमीं तिथि से युक्त एकादशी विद्धा कहलाती है जो 22 को है और द्वादशी तिथि से युक्त शुद्धा एकादशी 23 अप्रैल को है। इस एकादशी का व्रत करने से प्रभु बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और जीव के सभी पापों का नाश कर देते हैं। 


इस व्रत में क्या न करें?
एकादशी से एक दिन पहले से ही कांसे के बर्तन में भोजन न करें, मांस, मसूर की दाल, चने, शाक, शहद और पान आदि का सेवन न करें, किसी दूसरे के अन्न, दूसरी बार भोजन न करके अपने मन को पवित्र बनाएं, व्रत में जुआ न खेलें, रात्रि को शयन न करें, किसी की निंदा-चुगली न करें, किसी पर क्रोध न करें, झूठ न बोलें। 


व्रत में क्या करें?
इस व्रत में भगवान मधुसूदन जी का विधिवत पूजन करें। रात्रि को हरिनाम संकीर्तन करते हुए जागरण करें, मंदिर में दीप दान करें, तुलसी पूजन करें, भगवान पर पीले रंग के पुष्प चढ़ाएं, एक समय फलाहार करें, सत्संग में समय बिताएं, व्रत के अगले दिन ब्राह्मणों को यथाशक्ति दान देकर स्वयं अन्न ग्रहण करें। 

वीना जोशी
veenajoshi23@gmail.com 




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