चाणक्य नीति: इन 3 बातों से रहें बचकर, करना पड़ सकता है दुर्भाग्य का सामना

Friday, January 13, 2017 9:42 AM
चाणक्य नीति: इन 3 बातों से रहें बचकर, करना पड़ सकता है दुर्भाग्य का सामना

चाणक्य महान विद्वानों की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ स्थान रखते हैं। आचार्य चाणक्य एक बड़े दूरदर्शी विद्वान थे। चाणक्य की नीतियों में उत्तम जीवन का निर्वाह करने के बहुत से रहस्य समाहित हैं, जो आज भी उतने ही कारगर सिद्ध होते हैं। जितने कल थे। इन नीतियों को अपने जीवन में अपनाने से बहुत सारी समस्याओं से बचा जा सकता है और साथ ही, उज्जवल भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। चाणक्य ने व्यक्ति को दुर्भाग्य के तीन ऐसे संकेतों का उल्लेख किया है, जिनसे बचाना बहुत जरुरी है। 

 

कष्टं च खलु मूर्खत्वं कष्टं च खलु यौवनम्।
कष्टात् कष्टतरं चैव परगेहे निवासनम्।।

 

* चाणक्य के अनुसार किसी भी व्यक्ति के लिए मूर्ख या अज्ञानी होना दुर्भाग्य की बात है। मूर्ख व्यक्ति को जीवन में कभी भी सुख की प्राप्ति नहीं हो सकती। उसे जीवन के हर कदम में दुख अौर अपमान झेलना पड़ता है।

 

* दूसरी दुर्भाग्य की बात है दूसरों के घर में रहना। जब कोई व्यक्ति किसी के घर में रहता है तो उसके जीवन में कई प्रकार की मुश्किलें बनी रहती है। उनकी आजादी समाप्त हो जाती है। इसलिए पराए घर में रहने से बचना चाहिए।

 

* जवानी में धैर्य न होना दुर्भाग्य की तीसरी बात है। धैर्य के बिना जवानी दुखदाई होती है। जवानी में अधिक क्रोध अौर जोश होता है। उस समय धैर्य न रखा जाए तो सब कुछ बर्बाद हो सकता है। 
 




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