PU में 3 साल में पूरे होने वाले रिसर्च 8 साल बाद भी अधूरे

Tuesday, November 14, 2017 9:58 AM
PU में 3 साल में पूरे होने वाले रिसर्च 8 साल बाद भी अधूरे

चंडीगढ़(रश्मि) : पंजाब यूनिवर्सिटी के विभागों में जारी रिसर्च प्रोजैक्ट में काफी ऐसे हैं जिन पर रिसर्च करने के लिए सिर्फ तीन साल का समय दिया जाता है, लेकिन 8 से 9 साल पूरे होने के बाद भी यह प्रोजैक्ट अभी अधूरे हैं। यह रिसर्च पी.यू. के फैकल्टी मैंबरों द्वारा की जाती है और इनके लिए समय-समय पर फंड भी रिवाईज होते हैं। जानकारी के मुताबिक पी.यू. के कैमिस्टरी, बोटनी, बायोकैमिस्टरी, एंथरोपालॉजी जैसे कई विभाग में रिसर्च काफी समय से जारी है।

 

वजह फंड देरी से मिलना : 
विभिन्न रिसर्च प्रोजैक्ट पर काम कर रहे पी.यू. फैकल्टी सदस्यों का कहना है कि प्रोजैक्ट में देरी की एक वजह फंड समय पर न मिलना है। प्रोजैक्ट के लिए सिर्फ पी.यू. ही नहीं डी.एस.डी., डी.बी.टी. आदि साइंस एजैंसियों की तरफ से भी फंड दिए जाते हैं। कई बार यह समय पर नहीं दिए जाते जिससे रिसर्च में देरी हो जाती है। 

 

पैंडिंग पड़े प्रोजैक्ट :

-2009 से तीन साल के लिए 11 लाख 11 हजार 800 रुपए की लागत का था यह प्रोजैक्ट 

-एवॉल्यूशन ऑफ गैस्टरोइंटेस्टिीनियल मॉडूलरी एक्टिीविटी एवं एंटीडोटल पोटेंशियल ऑफ द मैडिसिनल प्लांट कांस्टीटयूटस अंगेस्ट ओर गैनोफोशेट पेस्टीसाईड पायजनिंग । 

-2011 से 3 साल के लिए 11 लाख 66 हजार रुपए की लागत वाला था यह प्रोजैक्ट मियो-पलोसीनल प्राईमेटस एंड अदर मामालिया इन द शिवालिक ऑफ नार्थ वेस्ट इन इंडिया। 

- 2009 से  5 लाख 34 हजार 367 रुपए की लागत से चल रहा है इस प्रोजैक्ट पर काम असेस्मैंट ऑफ बॉयोडॉयवर्सिटी एंड साईटो मारपोलॉजी ऑफ मेडिसिनल प्लांटस इन दोआबा रीजन ऑफ पंजाब। 

-2009 से 10 लाख 42 हजार रुपए की लागत का यह प्रोजेक्ट सिंथेटिक कैरेक्टराईजेशन एंड रिएक्टिीविटी  ऑफ एक्सरे एवं,एक्स,वी डॅायरी फलूरोएसेटोफीनोनस। 

-2009 से 7 लाख 71 हजार रुपए की लागत का यह प्रोजैक्ट डिवैल्पमैंट ऑफ टॉपीकल फॉरमूलेशन ऑफ इंटराकैनोजल यूजिग कोलआईडलडरग कैरियर सिस्टम। 
 



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