13 सफाई कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, तीन पर केस, गिरफ्तार

Wednesday, September 13, 2017 11:48 AM
13 सफाई कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, तीन पर केस, गिरफ्तार

चंडीगढ़(राय) : नगर निगम ने कुछ ही घंटे की हड़ताल में भाग लेने वाले ठेके पर रखे 13 सफाई कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया और इनमें से 3 के विरुद्ध पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज करवाई, जिन्हें आज गिरफ्तार कर लिया गया। आज 25 नियमित कर्मचारियों को बर्खास्त करने की सूची भी निगम के अतिरिक्त आयुक्त को भेजी गई। इस सूची में सफाई कर्मियों की यूनियन के अधिकांश नेता शामिल हैं। 

 

गत दिवस की हड़ताल के दौरान जिन 3 कर्मियों पर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी के कार्यालय के बाहर कचरा फैंकने वाले जिन थी उन कर्मचारियों के विरुद्ध पुलिस में रिपोर्ट दर्ज की गई थी उन्हें आज गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों में ठेके पर रखे गए चालक गुरचरण सिंह व कुलदीप सिंह तथा हैल्पर सर्वजीत सिंह शामिल हैं। 

 

आज मेयर ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि शहर की सफाई में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी। अगर नेतागिरी छोड़ कर सभी को काम करने के लिए कहा जा रहा है तो इसमें हड़ताल की धमकियां देने जैसी कार्रवाई जायज नहीं है। इससे पूर्व मेयर की अध्यक्षता में निगम पार्षदों की एक आपात बैठक भी बुलाई गई जिसमें कांग्रेस पार्षद, निर्दलीय पार्षद तथा मनोनीत पार्षद भी शामिल थे। सभी ने एकजुट होकर सफाई कर्मियों की हठधर्मिता के आगे न झुकने का व इस मामले में मेयर का साथ देने का निर्णय लिया। 

 

मेयर की दो टूक काम नहीं तो नौकरी नहीं :
मेयर का कहना था कि निगम ने सफाई कर्मियों की हर जरूरतों को आज तक पूरा किया है। इनकी लंबे समय से मृत कर्मियों के परिवार के सदस्य को नौकरी देने की मांग भी पिछले दिनों पूरी की गई व 5 प्रतिशत की दर से 26 लोगों को नियुक्ति पत्र भी दिए गए। उन्होंने कहा कि अब तो केवल उन्हें यह कहा जा रहा है कि काम नहीं तो नौकरी नहीं। मेयर ने कहा कि अगर निगम की सख्ती से यह लोग हड़ताल जैसा कदम उठते हैं तो उसके लिए भी निगम तैयार है।

 

हड़ताल की धमकियां देने की वजह से रुकी नई भर्ती : मेयर
मेयर ने सफाई कर्मियों के नियमित पदों पर भर्ती न होने का ठीकरा भी सफाई कर्मचारी यूनियन के नेताओं पर फोड़ दिया। उनका कहना था कि निगम ने तो सारी प्रक्रिया पूरी कर ली है पर इनके नेता बार-बार हड़ताल की धमकियां देते हैं जिससे नई भर्ती रुकती जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस कंपनी से निगम सफाई कर्मी ठेके पर लेता है उन्हें भी आगाह कर दिया गया है कि अगर उनके भेजे कर्मी हड़ताल में शामिल हुए तो उनका ठेका भी रद्द हो सकता है। 

 

सभी कांग्रेस पार्षदों ने किया मेयर का समर्थन :
मेयर के साथ कांग्रेस के सभी पार्षद खड़े दिखे। पार्टी के विरुद्ध मेयर का साथ देने पर कांग्रेस पार्षद रविंद्र कौर गुजराल ने कहा कि शहर की सफाई के लिए उन सबने पार्टी से ऊपर उठकर निर्णय लिया। मेयर ने कहा कि कल भी इन लोगों ने निगम के गैराज से ट्रक नहीं निकलने दिए तो पुलिस की सहायता लेनी पड़ी व फिर इन्होंने डंपिंग ग्राऊंड पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। वहां भी स्वास्थ्य अधिकारी ने पुलिस लगवा दी। 

 

मेयर ने दावा किया कि सफाई कर्मियों में से 5 प्रतिशत ही हैं जो नेतागिरी करते हैं बाकी के काम करते हैं। इस अवसर पर निगम के वरिष्ठ उपमहापौर राजेश गुप्ता, उपमहापौर अनिल कुमार दूबे, पार्षद अरुण सूद, सथीश कैंथ, रविकांत शर्मा, रविंद्र कौर गुजराल, चंद्रावथी शुक्ला, फर्मिला, राजेश कालिया, गुरप्रीत ढिल्लों, सुनीता धवन, कर्नल कांडल, दविंद्र सिंह बबला भी उपस्थित थे। 

 

गृह सचिव के पास पहुंचे यूनियन के नेता :
जहां मेयर सभी पार्षदों से सफाई कर्मियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के लिए सभी पार्षदों के साथ बैठक कर रही थी, वहीं सफाई कर्मचारी यूनियन के नेता प्रशासन के गृह सचिव के पास पहुंच गए। उन्होंने न केवल 13 लोगों को निकाले जाने, गिरफ्तार कर्मियों को बिना शर्त छोड़े जाने तथा लीडरों पर होने जा रही संभावित कार्रवाई को रोके जाने की मांग की। 

 

गृह सचिव ने मेयर को संदेश दिया कि इनसे बैठ कर बातचीत की जाए। दोपहर बाद इंटक नेता रणजीत हंस सफाई कर्मियों की ओर से मेयर से मिले पर मेयर ने उनकी नहीं सुनी। यूनियन ने अपनी बैठक शुरू की। देर शाम तक मेयर द्वारा बर्खास्त करने के लिए भेजी 25 नियमित सफाई कर्मचारियों की सूची पर कोई निर्णय नहीं हो पाया। 

 

सूत्रों के अनुसार प्रशासन के गृह सचिव एवं स्थानीय निकाय सचिव ने मेयर को सफाई कर्मचारियों के साथ बातचीत कर मामला सुलटाने को कहा है। देर शाम तक यह सूचना भी दी गई कि कोलस यूनियन के प्रधान कृष्ण कुमार चड्ढा तथा पूर्व प्रधान श्यामलाल घावरी को बर्खास्त किया गया है। इसकी पुष्टि भी किसी निगम अधिकारी अथवा मेयर ने नहीं की जबकि यूनियन के नेताओं का कहना था कि मेयर के पास उन्हें बर्खास्त करने का अधिकार ही नहीं है।
 




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