आयातित गेहूं खपाने को फरेब का सहारा, शिकंजा कसने की तैयारी में सरकार

Monday, February 27, 2017 3:23 PM
आयातित गेहूं खपाने को फरेब का सहारा, शिकंजा कसने की तैयारी में सरकार

नई दिल्लीः धुएं द्वारा कीटनाशक प्रक्रिया (फ्यूमिगेशन) अपनाए बिना गेहूं के आयात पर सरकारी नियम के तहत रोक के बावजूद भारत में इसका प्रवेश और सेवन लोगों की सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। यह देखते हुए इस नियम में 31 मार्च से और ज्यादा सख्ती की जा रही है। लेकिन कुछ आयातकों ने धुएं द्वारा कीटनाशक प्रक्रिया के नकली प्रमाण-पत्रों के जरिए गेहूं भारत में लाने का तरीका निकाल लिया है।

ये हैं नियम
नियमों के तहत भारत में गेहूं के आयात के लिए उसी बंदरगाह पर ही मिथाइल ब्रोमाइड के धुएं से कीटनाशक प्रक्रिया अपनायी गई होनी चाहिए जहां से उसे भेजा गया हो। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो ऐसी खेपों के लिए भारतीय बंदरगाहों पर धुएं से कीटनाशक प्रकिया अपनाई जाती है। 31 मार्च से यह प्रकिया खेप भेजे जाने वाले बंदरगाहों पर ही पूरी की जाएगी।

कंपनियों ने की आयातकों के साथ सांठगांठ
व्यापारियों ने कहा कि कुछ वैश्विक कंपनियों ने आयातकों के साथ सांठगांठ करके जाली प्रमाण-पत्रों के जरिए यह दिखाया था कि बंदरगाह से रवाना होने के बाद जहाजों को धुएं से कीट रहित कर लिया गया था। इससे 2016-17 के दौरान पिछले 10 सालों में सर्वाधिक 50.5 लाख टन के आयात के बीच धुएं से कीटनाशक प्रक्रिया के बिना ही कई टन गेहूं भारत में आने की आशंका है। इस संबंध में व्यापारियों का एक वर्ग कृषि मंत्रालय से औपचारिक शिकायत दर्ज करने की तैयारी कर रहा है।

पकड़े जाने पर देना पड़ सकता है जुर्माना
भारतीय नियमों के अनुसार अगर आयात वाली कृषि जिंसों को स्रोत वाले स्थान पर ही धुएं से कीट रहित नहीं किया जाता है तो 75 डॉलर के सामान्य शुल्क की तुलना में प्रति टन 375 डॉलर रुपए का जुर्माना देकर इस प्रक्रिया को भारतीय तटों पर किया जा सकता है। व्यापारिक सूत्रों के अनुसार इस अतिरिक्त भुगतान से बचने के लिए कुछ आयातकों ने यह दिखा दिया कि गेहूं की खेपों के लिए इस प्रकिया को मूल बंदरगाह, खासतौर पर कुछ अफ्रीकी देशों से रवाना होने के लिए रास्ते में पूरा कर लिया गया था। बाद में कंटेनरों की जांच में पाया गया कि भारत में गेहूूं लाने वाला वह जहाज तो कभी उन अफ्रीकी देशों में पहुंचा ही नहीं था और धुएं से कीटनाशक प्रक्रिया के दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ की गई थी। भारत में उपस्थित अनाज व्यापार की बहुराष्ट्रीय कंपनी के एक प्रतिनिधि ने कहा कि 50,000 टन लाने वाले एक जहाज को प्रति टन 300 डॉलर का जुर्माना देते हुए 1.5-2 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है।

मार्च में नए नियमों से मिल सकती है राहत
यह देखते हुए कि आयात अनुबंध पहले ही किया जा चुका है, 31 मार्च से नए नियमों के तहत कुछ राहत मिल सकती है। कीट नियंत्रण रिपोर्ट का विश्लेषण करने तक भारत अंतरिम रूप से गेहूं के आयात को मंजूरी दे सकता है। विश्व के प्रमुख गेहूं निर्यातक देशों में से एक ऑस्ट्रेलिया अपने बंदरगाहों पर धुएं से कीटनाशक रहित करने की प्रक्रिया को अनुमति देता है। रिपोर्ट के अनुसार सरकार कनाडा से आयातित दलहन के लिए धुएं से कीटनाशक रहित करने की प्रक्रिया के संबंध में कुछ राहत देने पर विचार कर रही है।



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