रेरा: 1 मई से नहीं चलेगी बिल्डरों की मनमानी

Saturday, April 29, 2017 9:28 AM
रेरा: 1 मई से नहीं चलेगी बिल्डरों की मनमानी

नई दिल्ली: अगर आप घर खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो 1 मई तक इंतजार करें क्योंकि 1 मई से रियल एस्टेट रैगुलेशन एक्ट लागू हो जाएगा। यह एक्ट रियल एस्टेट बिल्डरों के लिए भी कई नए नियम लेकर आया है। राज्यसभा में यह बिल गत वर्ष पास किया गया था जिसका अहम उद्देश्य बिल्डरों की मनमानी को रोकना और यूजर्स को फायदा पहुंचाना है।

इन राज्यों में लागू हैं रेरा के नियम 
रियल एस्टेट रैगुलेटर की तैयारी अंतिम चरण में है। रेरा को लेकर सभी राज्यों में तैयारियां जोरों पर हैं। कुछ राज्यों ने रेरा के नियमों को नोटीफाई किया है जबकि अन्य राज्यों में ड्राफ्ट लैवल पर काम जारी है। रियल एस्टेट रैगुलेटर से बिल्डरों पर लगाम कसेगी और घर खरीदारों को नई ताकत हासिल होगी। इसके साथ ही ब्रोकरों की मनमानी भी बंद होगी। हर राज्य में रियल एस्टेट रैगुलेटरी अथॉरिटी बनेगी और हर राज्य में रैगुलेटर नियुक्त होगा। जिन राज्यों में रेरा के नियमों को नोटीफाई किया गया है उनमें केरल, महाराष्ट्र, पंजाब, मिजोरम, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, अंडेमान और निकोबार द्वीप समूह और चंडीगढ़ शामिल हैं जबकि उड़ीसा, बिहार, झारखंड, असम, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, त्रिपुरा, दादर और नगर हवेली, दमन ओर द्वीव में इसके लागू होने की संभावना है।

क्या हैं रेरा के नए नियम
रियल एस्टेट रैगुलेटर के नियमों के तहत बिना रजिस्ट्रेशन के प्रोजैक्ट नहीं बिकेंगे और बिना रजिस्ट्रेशन विज्ञापन नहीं होगा। जरूरी मंजूरियों के बाद ही प्रोजैक्ट रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी होगी। प्रोजैक्ट से जुड़ी हर जानकारी वैबसाइट पर डालनी होगी, साथ ही प्रोजैक्ट के लिए अलग से एस्क्रो अकाऊंट भी बनाना होगा और एस्क्रो अकाऊंट में 70 फीसदी पैसा रखना होगा। प्रॉपर्टी ब्रोकर भी रियल एस्टेट रैगुलेटर के दायरे में आएंगे। रियल एस्टेट रैगुलेटर के नियमों के तहत बिल्डर को 5 साल तक प्रोजैक्ट के मुरम्मत का जिम्मा उठाने का प्रावधान किया गया है, इसके अलावा बिल्डर लेट पेमैंट पर मनमाना जुर्माना भी नहीं वसूल पाएंगे। बिल्डर की मर्जी से डील कैंसिल नहीं होगी और बिल्डर ओपन पार्किंग नहीं बेच सकेंगे। नए एक्ट के मुताबिक रियल एस्टेट प्रोजैक्ट का हर फेज एक अलग प्रोजैक्ट माना जाएगा।

अगर कोई बिल्डर 5 फेज का प्रोजैक्ट लेकर आता है तो उसे पांच अलग-अलग बार रजिस्ट्रेशन करवानी होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि जो ग्राहक प्रोजैक्ट पूरा होने से पहले ही इन्वैस्टमैंट कर देते हैं अक्सर उन्हें काफी समय इंतजार करना पड़ता है।

बिल्डरों को 70 प्रतिशत पैसा जो ग्राहकों ने दिया है, एक ही अकाऊंट में रखकर चालू प्रोजैक्ट में लगाना होगा। कई बार बिल्डर एक प्रोजैक्ट का पैसा दूसरे प्रोजैक्ट में लगा देते हैं और इससे ग्राहकों को समय पर कब्जा नहीं मिल पाता।




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