अब विदेशी बेनामी सम्पत्तियों की बारी

Sunday, September 10, 2017 11:41 AM
अब विदेशी बेनामी सम्पत्तियों की बारी

मुम्बई: काले धन के खिलाफ मुहिम में मोदी सरकार के निशाने पर अब विदेशी बेनामी सम्पत्तियां हैं। आयकर विभाग इन विदेशी सम्पत्तियों पर वार करने की तैयारी में है। इस संबंध में विभाग ने अपनी 6 कंपनियों और सम्पत्तियों का खुलासा नहीं करने वाले 5 सर्राफा कारोबारियों के खिलाफ मुकद्दमा शुरू किया है। बताया जा रहा है कि कर वंचना के लिए चर्चित ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में इन लोगों पर सम्पत्तियां और कंपनियां रखने का आरोप है। ये लोग सोने और हीरे के निर्यात कारोबार से जुड़े हैं तथा इनका भारत में अच्छा-खासा कारोबार है। इनकी कुल अघोषित विदेशी सम्पत्ति करीब  5000 करोड़ रुपए की बताई जाती है।

2013 में जारी सूची में थे 612 भारतीयों के नाम 
इंटरनैशनल कंसोॢटयम ऑफ  इन्वैस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आई.सी.आई.जे.) ने वर्ष 2013 में एक सूची जारी की थी जिसमें 612 भारतीयों के नाम थे। ये पांचों कारोबारी इस सूची में शामिल हैं। इस संस्था ने विदेश में मौजूद हजारों गुप्त कंपनियों, ट्रस्टों और फंडों का खुलासा किया था। कर अधिकारियों के अनुसार इन मामलों में पक्के सबूत हैं। इन लोगों ने विदेशों में निवेश किया और गुप्त लेन-देन किया मगर अपने कर विवरण में इसे शामिल नहीं किया।

इन लोगों पर इस कैरेबियाई द्वीप की कंपनियों के शेयर और सम्पत्तियां रखने का आरोप है। ऐसा पहली बार है कि इस आइलैंड की सूची की जांच में आयकर विभाग को भारी मात्रा में कर चोरी का पता चला है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विभाग को विभिन्न स्रोतों से जानकारी मिली है जिनका इन लोगों के प्रोफाइल और देश-विदेश में घोषित उनकी सम्पत्तियों से मिलान किया गया है। विभाग के पास मौजूद दस्तावेजों से भारी मात्रा में बेनामी विदेशी धन का खुलासा हुआ है।
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292 लोगों और फर्मों की प्रारंभिक जांच
अभी तक विभाग ने 292 लोगों और फर्मों की प्रारंभिक जांच की है। ये सभी मुम्बई के हैं। इनमें से 151 मामले कार्रवाई के लायक हैं और जांच चल रही है। सूत्रों के अनुसार 15 मामलों में अभियोजन शुरू हो गया है जिनमें से 5 की मुम्बई में विशेष अदालत में सुनवाई होगी। इसके अलावा विभाग की जांच शाखा ने आकलन शाखा को 19 मामले भेजे हैं। इनमें 3117 करोड़ रुपए का अघोषित विदेशी धन शामिल है। मुम्बई के कम से कम 7 नामी लोगों के यहां तलाशी ली गई है।

तलाशी के दौरान कई विदेशी बैंक खातों का पता चला है जिनका जाहिर तौर पर खुलासा नहीं किया गया था। डायमंड ज्वैलरी के एक निर्यातक के यहां 2150 करोड़ रुपए के विदेशी मुद्रा लेन-देन की बात सामने आई है। एक अन्य मामले में करदाता का लाभार्थी के रूप में पता चला। उसका सिंगापुर के यू.बी.एस. ए.जी. में खाता है। अधिकारी ने बताया कि इस खाते से उस शख्स की भारत में मौजूद कंपनियों के खातों में भुगतान किया गया।

पनामा जांच अटकी 
इस बीच आयकर अधिकारी पनामा खुलासे की जांच में कामयाब नहीं हो पाए हैं। इसकी वजह पनामा के अधिकारियों द्वारा सूचना न दिया जाना है। शुक्रवार को सी.बी.डी.टी. के अधिकारियों की बैठक में भी यह मामला उठा। यह बैठक ऑप्रेशन क्लीन मनी के तहत विदेशी मामलों और उनसे जुड़ी जांच का जायजा लेने के लिए बुलाई गई थी।

अधिकारियों का कहना है कि जो जानकारी दी गई है वह प्रारंभिक किस्म की है और उससे सुराग लगाना व सबूत जुटाना मुश्किल है। पनामा के अधिकारियों का कहना है कि वे सूचनाओं का खुलासा करने की स्थिति में नहीं हैं। पिछले हफ्ते आयकर विभाग का एक अधिकारी जांच के सिलसिले में पनामा गया था लेकिन खाली हाथ लौटा।
 



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