GST के साथ वैट घोटाला भी आने लगा सामने

Sunday, February 11, 2018 4:32 AM
GST के साथ वैट घोटाला भी आने लगा सामने

लुधियाना: पंजाब सेल टैक्स विभाग जी.एस.टी. बिल घोटाले की जांच करने तो जा रहा है लेकिन साथ ही उन्हें वैट घोटाले संबंधित दस्तावेज भी हाथ लगने शुरू हो गए हैं। अभी तक जो कुछ सामने आया है उससे यह पता चला है कि पंजाब में वैट के दौरान भी जाली बिलों का खेल काफी खेला गया है। लोगों ने इन्हीं बिलों के आधार पर अरबों रुपए के वैट रिफंड भी ले लिए हैं और अधिकारियों ने भी बिना जांच के अंधाधुंध रिफंड जारी कर दिए। अब धीरे-धीरे घपले के ये केस भी सामने आने शुरू हो गए हैं। 

1 जुलाई 2017 से जी.एस.टी. लागू हुआ है। उसके बाद से वैट सिस्टम की जगह जी.एस.टी. लगाकर बिल दिए जा रहे हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने जी.एस.टी. टैक्स चोरी को रोकने के लिए लगाया है। लेकिन इसमें वैट से ज्यादा टैक्स की चोरी होनी शुरू हो गई है। पिछले करीब 20 दिनों में विभाग ने जितनी भी छानबीन की उसमें सबका जरिया बैंकों की स्टेटमैंट है। इन स्टेटमैंट के आधार पर अभी यह बता पाना विभाग के लिए भी मुश्किल होता जा रहा है कि जी.एस.टी. में कौन सी ट्रांजैक्शन जाली बिल के जरिए है और कौन सी असली बिल से की जा रही है। 

विभाग भी पिक एंड चूज पॉलिसी के तहत लोगों को पकड़ रहा है। मंडी गोङ्क्षबदगढ़ में 2 ऐसे किंगपिन मौजूद हैं जिन पर अधिकारी हाथ डालने से घबरा रहे हैं। छोटे मोटे लोगों के कागजात कब्जे में लेकर विभाग अपनी पीठ थपथपा रहा है। लेकिन अभी तक उनकी जांच भी पूरी नहीं कर पाया। परंतु अब अधिकारी उलझ गए हैं कि वैट रिफंड से संबंधित जो कागजात मिल रहे है उनकी जांच कैसे की जाए। वजह जो इंवैस्टीगेशन विभाग इसमें जुटा हुआ है वह पूरे पंजाब में हुए वैट घोटाले की फाइलें कैसे खोलेगा। वजह, इंवैस्टीगेशन स्टाफ  भी सीमित संख्या में मौजूद है। अगर स्थानीय कार्यालय को वैट के केस खोलने के बारे में कहता है तो जांच सही न होने की वजह सामने आ रही है। यदि अधिकारियों ने रिफंड जांच परख कर दिए होते तो छापों के दौरान इंवैस्टीगेशन विभाग को वैट के दस्तावेज न मिलते। वैट की जांच कैसे होगी यह सेल टैक्स विभाग के सामने एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। 

असलीयत सामने आई तो करने लगे रिफंड घोटाले की सी.बी.आई. जांच की मांग
वर्ष 2013 में करोड़ों रुपए के वैट घोटाले संबंधित एक केस अदालत में गया था। इसमें साबित हो गया था कि विभाग ने वैट रिफंड जाली तरीके से दिए है। उसी के आधार पर अदालत ने सारे रिफंडों की सी.बी.आई. जांच करवाने के आदेश दिए थे। लेकिन अधिकारियों ने लुधियाना की कुछ एसोसिएशनों के प्रधानों से अदालत में एफीडेविट दिलवा दिया कि यदि सी.बी.आई. जांच हुई तो तमाम इंडस्ट्री का रिफंड फंस जाएगा। अधिकारियों की इस चाल में औद्योगिक नेता आ गए और सी.बी.आई. जांच पर स्टे मिल गया। लेकिन अब इन्हीं प्रधानों को समझ में आया कि अधिकारी अपना बचाव करके इंडस्ट्री को रिफंड न देकर इन सारे केसों से बाहर निकल रहे हैं। 

कुछ ऐसी एसोसिएशन सामने आई हैं जो अब सी.बी.आई. से वैट रिफंड घोटाले की जांच करवाने की मांगे करने लगी हैं। इस बारे में कुछ औद्योगिक नेताओं ने सी.बी.आई. को पत्र भी लिख दिया है। यहां बता दें कि जिन अधिकारियों ने उस वक्त जांच रुकवाई थी उन्हें जी.एस.टी. विभाग में पंजाब सरकार ने फिर से बड़े पदों पर बिठा दिया है। इससे सवाल खड़ा हो गया है कि वैट घोटाले वाले ये अधिकारी कितनी निष्पक्षता से जी.एस.टी. घोटाले की जांच करेंगे। पंजाब केसरी के पास वैट के जाली बिल और जाली रिफंड के केस आने शुरू हो गए हैं। इनका खुलासा एक-एक करके जल्द किया जाएगा।



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