रियल एस्टेटः दीवाली के बाद भी जारी हैं फैस्टिव ऑफर

Saturday, October 28, 2017 9:41 AM
रियल एस्टेटः दीवाली के बाद भी जारी हैं फैस्टिव ऑफर

जालंधरः दीवाली गुजर चुकी है और यह गुजरी दीवाली भी रियल्टी मार्कीट की मंदी को सुधार नहीं पाई। रियल एस्टेट से जुड़े एक्सपर्ट और डिवैल्पर्स का मानना था कि इतनी स्कीम और छूट के बाद भी अगर दीवाली जैसे सीजन में मार्कीट नहीं सुधरी तो हालात और भी बुरे हो सकते हैं लेकिन फिर भी रियल्टी मार्कीट से जुड़ी कम्पनियों का दावा है कि भले ही दीवाली गुजर गई हो, आने वाले समय में दी जाने वाली रियायतों से रियल्टी मार्कीट में सुधार आएगा। रियल्टी कम्पनियों का दावा है कि भले ही दीवाली को बीते कुछ दिन हो चुके हैं लेकिन फैस्टिव सीजन खत्म नहीं हुआ है। उनके दावों के मुताबिक फैस्टिव सीजन में दिए जाने वाले सभी ऑफर फिलहाल बने रहेंगे ताकि खरीदार आएं। आइए आपको भी बताते हैं कि रियल्टी सैक्टर में किस तरह के ऑफर की भरमार है।

कैश रिफंड
अधिकांश रियल्टी ग्रुप से जुड़े  सैक्टरों ने फैस्टिव सीजन में बड़े फ्लैट्स पर 150-450 प्रति स्क्वेयर फुट तक का कैश डिस्कांऊट दिया या फिर उनके प्लान के तहत फ्लैट बुक कराते हैं तो 50 लाख के फ्लैट पर आपको 5 से 8 लाख तक का डिस्काऊंट मिलता है। यह स्कीम ओमैक्स, अतंरिक्ष ए.टी.एस., सुपरटैक के इकोविलेज सहित कई जगहों पर लागू है। इसके अलावा अगर मौजूदा समय में बिल्डरों ने एक साल की चल रही स्कीम को कैश रिफंड के तहत जोड़ दिया है। इसके तहत रजिस्ट्रेशन और स्टांप ड्यूटी चार्जेस से छूट और फ्री कार पार्किंग आदि के ऑफर हैं।

मॉडयूलर किचन व होलीडे पैकेज
फैस्टिव सीजन में रियल्टी कंपनियां कई तरह के आकर्षक पैकेज भी दे रही हैं। इनके तहत फ्री मॉड्यूलर किचन, मुफ्त टू या फोर व्हीलर, हॉलीडे पैकेज, गोल्ड क्वॉइन, व्हाइट गुड्स आदि शामिल हैं। कम्पनियों का दावा है कि इन ऑफरों से खरीदार के लिए अन्य दिनों की तुलना में 5 से 7 प्रतिशत तक फ्लैट की कीमत कम हो जाती है। हालांकि, कुछ लोगों का दावा है कि बिल्डर्स गिफ्ट के तौर पर दिए जाने वाली इन चीजों की लागत को छुपा कर पहले से ही जोड़ लेते हैं। दूसरी ओर कम्पनियों ने इस दावे को झूठा बताते हुए कैश का प्रावधान रख दिया है जिसके तहत अगर आप किसी स्कीम को नहीं चाहते हैं तो फ्री चीजों के बदले में कैश डिस्काऊंट ले सकते हैं लेकिन तय शर्तों के अनुसार, चीजों के मूल्य की लगभग 50 प्रतिशत रकम ही दी जाती है।
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पेमेंट प्लान में बदलाव
पहले डिवैल्पर्स कब्जे पर 10 प्रतिशत भुगतान का प्लान रखते थे और पेमेंट लेट हो जाए तो उस पर 17 से 25 प्रतिशत ब्याज और लेट फाइन भी जोड़ा जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं है। मौजूदा समय में फैस्टिव सीजन के तहत अभी 7-8 प्रतिशत का भुगतान करें और बाकी प्रॉपर्टी का कब्जा मिलने पर या कब्जा नहीं मिलने तक कोई मासिक किस्त नहीं जैसे फ्लैक्सिबल पेमेंट प्लान कई डिवैल्पर्स ऑफर कर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि इन स्कीमों का मकसद खरीदारों की कैश की ङ्क्षचता को खत्म करना है। हालांकि, ये प्लान सस्ते नहीं होते। सबवैंशन स्कीम का विकल्प चुनने वालों के लिए प्रॉपर्टी की कीमत फुल पेमेंट करने वालों के मुकाबले ज्यादा होती है।

जी.एस.टी. की छूट
कई डिवैलपर्स अपने प्रोजैक्ट्स पर जी.एस.टी. से छूट या कोई जी.एस.टी. नहीं जैसी ऑफर पेश कर रहे हैं। पहली नजर में लगता है कि कि जी.एस.टी. के इस डिस्काऊंट से खरीदार को सीधा 12 प्रतिशत डिस्काऊंट (अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोजैक्ट्स पर 12 प्रतिशत जी.एस.टी.) मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं है। अगर बिल्डर रजिस्ट्री से पहले इस पैसे को कंस्ट्रक्शन लागत में जोड़ देता है तो इसका लाभ आपको मिलता है अन्यथा नहीं। बता दें कि जी.एस.टी. केवल अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजक्ट्स पर लागू है जिन्हें ऑक्युपैंसी सर्टीफिकेट (ओ.सी.) नहीं मिला है। लिहाजा, रैडी टू मूव इन प्रॉपर्टी पर जी.एस.टी. माफी के झूठे दावे से न तो बेचा जा सकता है और न ही खरीदा। अगर कोई बिल्डर किसी अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी पर जी.एस.टी. बैनिफिट ऑफर कर रहा है तो ऐसे में खरीदारों को सावधान रहने की जरुरत है। 
 



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