एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करती हैं फास्ट फूड बहुराष्ट्रीय कम्पनियां : CSE

Wednesday, November 15, 2017 11:28 AM
एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करती हैं फास्ट फूड बहुराष्ट्रीय कम्पनियां : CSE

नई दिल्ली: सैंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमैंट (सी.एस.ई.) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि भारत में कई बहुराष्ट्रीय कम्पनियां अपने फास्ट फूड उत्पादों में जबरदस्त एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल कर रही हैं। इससे बच्चों की सेहत दाव पर लग गई है। एंटीबायोटिक्स बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे खत्म कर देती हैं। 

भारत में हो रहा खुल्लम-खुल्ला नियमों का उल्लंघन
रिपोर्ट कहती है कि यही बहुराष्ट्रीय कम्पनियां अमरीका और अन्य देशों में सख्त नियमों का पालन करती हैं जबकि भारत में ये खुल्लम-खुल्ला इनका उल्लंघन कर रही हैं। सोमवार को विश्व एंटीबायोटिक जागरूकता सप्ताह की शुरूआत पर यह रिपोर्ट जारी की गई है।

सी.एस.ई. के उप-निदेशक चंद्रभूषण ने कहा कि ये बहुराष्ट्रीय कम्पनियां अमरीका और अन्य यूरोपियन देशों में सख्ती से नियमों का पालन व अनुसरण करती हैं जबकि भारत में यही कम्पनियां एंटीबायोटिक को लेकर किसी तरह का मानक नहीं अपनातीं। इसकी वजह से यहां जो इन बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के फास्ट फूड उत्पाद खा रहे हैं उनमें एंटी माइक्रोबियल रजिस्टैंस (ए.एम.आर.) बढ़ रहा है।

मैकडोनाल्ड ने नहीं दिया कोई जवाब
चंद्रभूषण ने बताया कि भारत में मैकडोनाल्ड के 300 से अधिक आऊटलैट हैं। ये बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। सी.एस.ई. ने इनसे संपर्क कर पूछा था कि आप कई देशों में चिकन या अन्य मीट सप्लाई उत्पादों में एंटीबायोटिक के इस्तेमाल पर रोक लगा चुके हैं या फिर 2019 तक आपने वादा किया है लेकिन भारत में इस बाबत आपके पास कोई रोडमैप नहीं है। इस पर आप क्या कर रहे हैं? कम्पनी की ओर से इस प्रश्न पर कोई जवाब नहीं दिया गया। इसी तरह सी.एस.ई. ने 11 विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों और कई भारतीय कम्पनियों से जवाब मांगा था जो भारत में मीट फास्ट फूड का कारोबार कर रही हैं। इनमें से 7 मल्टीनैशनल और एक भारतीय ब्रांड ने जवाब नहीं दिया।

कम्पनियां एंटीबायोटिक दवाओं के किसी भी उपयोग को रोकें 
सी.एस.ई. ने मांग की है कि फास्ट फूड कम्पनियां चिकन, मछली और अन्य मांस के लिए उनकी आर्पूति शृंखलाओं में विकास की पदोन्नति और रोग की रोकथाम के लिए नियमित एंटीबायोटिक उपयोग को खत्म करे। उन्हें गंभीर रूप से महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक दवाओं के किसी भी उपयोग को रोकने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। उसने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ  इंडिया (एफ.एस.एस.ए.आई.) से कहा है कि वह इसकी रोकथाम में बड़ी भूमिका निभा सकता है।



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